Jharkhand: झारखंड के कई जिलों में सरकारी भंडारण व्यवस्था की गंभीर खामियां सामने आई हैं। हाल ही में किए गए निरीक्षण में यह पाया गया कि बड़ी मात्रा में खाद्यान्न खराब हो चुका है, जो अब उपभोग के लायक नहीं बचा। यह खुलासा महालेखाकार द्वारा किए गए संयुक्त निरीक्षण के दौरान हुआ, जिससे सरकारी तंत्र की लापरवाही पर सवाल खड़े हो गए हैं।
हजारों क्विंटल अनाज बर्बाद
जांच रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी सिंहभूम, गढ़वा और चतरा जिलों के गोदामों में रखे गए लगभग 3694.59 क्विंटल चावल खराब हो गए। इसके अलावा सैकड़ों क्विंटल दाल, गेहूं, नमक और चीनी भी सड़कर बेकार हो चुके हैं। कई स्थानों पर अनाज की स्थिति इतनी खराब थी कि उसे इंसानों के उपयोग के योग्य नहीं पाया गया।
बारिश और खराब रखरखाव बना कारण
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि गोदामों के रखरखाव में भारी लापरवाही बरती गई। कई जगहों पर छत क्षतिग्रस्त होने के कारण बारिश का पानी अंदर पहुंच गया, जिससे खाद्यान्न को नुकसान हुआ। एक मामले में तो करीब 60 क्विंटल चीनी बारिश के पानी में बह जाने की बात भी सामने आई है।
पुराना स्टॉक बना समस्या की जड़
निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि कई गोदामों में 2017-18 से ही खाद्यान्न का स्टॉक पड़ा हुआ था। लंबे समय तक बिना उपयोग के रखे जाने के कारण अनाज में कीड़े लग गए और वह पूरी तरह खराब हो गया। कुछ स्थानों पर हाल ही में प्राप्त चावल में भी गुणवत्ता संबंधी खामियां पाई गईं।
रिकॉर्ड में पहले से दर्ज थी खराबी
जांच टीम को यह भी जानकारी मिली कि कई गोदामों में खाद्यान्न खराब होने की सूचना पहले ही रिकॉर्ड में दर्ज थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे साफ है कि संबंधित विभागों ने समस्या को नजरअंदाज किया।
पोषण योजना पर भी पड़ा असर
गढ़वा जिले में पोषण कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार से मिले हजारों क्विंटल चावल भी बेकार पड़े मिले। इससे यह चिंता बढ़ गई है कि योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा है।
जवाबदेही पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने सरकारी भंडारण व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते उचित देखभाल और वितरण किया जाता, तो इतनी बड़ी मात्रा में अनाज खराब होने से बचाया जा सकता था।
सुधार की जरूरत
यह मामला स्पष्ट करता है कि खाद्यान्न के भंडारण, निगरानी और वितरण प्रणाली में सुधार की तत्काल आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और जरूरतमंदों तक समय पर खाद्य सामग्री पहुंचाई जा सके।