Jharkhand Politics: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने झारखंड के परिवहन सचिव और आईएएस अधिकारी राजीव रंजन पर गंभीर प्रशासनिक अनियमितता के आरोप लगाए हैं. प्रदेश भाजपा प्रवक्ता अजय साह ने गुरुवार को रांची स्थित पार्टी कार्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान सरकार से मांग की कि "राजीव रंजन ने 24 घंटे तक परिवहन आयुक्त के पद पर रहते हुए जो भी निर्णय लिए हैं, उनकी उच्चस्तरीय समीक्षा की जाए." भाजपा का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर खुद को एक दिन के लिए सर्वेसर्वा बनाने का यह एक अभूतपूर्व और संदेहास्पद मामला है.
दो दिनों में जारी हुए दो विरोधाभासी आदेश
अजय साह ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि 10 मार्च 2026 को कार्यालय आदेश संख्या 24 जारी कर राजीव रंजन ने परिवहन आयुक्त के सभी अधिकार स्वयं के पास लेने का एक "अवैध आदेश" पारित कर दिया. चौंकाने वाली बात यह है कि अगले ही दिन यानी 11 मार्च को कार्यालय आदेश संख्या 25 के माध्यम से उन्होंने अपने ही पिछले आदेश को निरस्त (Cancel) कर दिया. भाजपा प्रवक्ता का सवाल है कि आखिर मात्र 24 घंटे के लिए शक्तियों का यह हस्तांतरण क्यों किया गया और इस दौरान किन फाइलों का निपटारा हुआ.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन का आरोप
भाजपा के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम न केवल प्रशासनिक मर्यादा के खिलाफ है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों की भी अवहेलना है. अजय साह ने कहा कि "राज्य सरकार की आधिकारिक गजट अधिसूचनाओं का उल्लंघन कर खुद को परिवहन आयुक्त के रूप में स्थापित करना एक गंभीर मामला है." उन्होंने आरोप लगाया कि इस छोटी सी अवधि में कुछ विशेष लोगों या हितों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से फाइलों को पास या स्वीकृत किया गया होगा, जिसकी बारीकी से जांच होनी चाहिए.
निष्पक्ष जांच और फाइलों की समीक्षा की मांग
भाजपा ने इस प्रकरण को गंभीर प्रशासनिक भ्रष्टाचार का संकेत बताते हुए मांग की है कि 10 और 11 मार्च के दौरान परिवहन विभाग में लिए गए सभी फैसलों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराई जाए.