Jharkhand Politics: झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने गुरुवार को रांची स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने रमजान, सरहुल और चैत्र नवरात्र की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि "केंद्र की गलत नीतियों के कारण आज देश महासंकट की स्थिति में पहुंचा है." उन्होंने विदेश नीति से लेकर घरेलू मोर्चे तक सरकार को पूरी तरह विफल बताया.
विदेश नीति और फंसे हुए भारतवंशियों का उठाया मुद्दा
सुप्रियो भट्टाचार्य ने केंद्र की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में अमेरिका के साथ बढ़ते रिश्तों के कारण देश कमजोर हुआ है. उन्होंने दावा किया कि "मिडिल ईस्ट, यूरोप और अमेरिका जैसे क्षेत्रों में करीब ढाई करोड़ भारतवंशी फंसे हुए हैं, लेकिन एयर रूट ठप होने के कारण वे वापस नहीं आ पा रहे हैं." उन्होंने विशेष रूप से कहा कि ईद के मौके पर खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय मुसलमान घर नहीं लौट पा रहे हैं और सरकार उन्हें वापस लाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है.
कोयले और पेट्रोलियम की कीमतों पर घेरा
घरेलू मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए जेएमएम नेता ने कहा कि पेट्रोलियम और कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर कृषि, उद्योग और स्वास्थ्य क्षेत्र पर पड़ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि "सरकार ने कोयला खदानें निजी कंपनियों को दे दी हैं, जिससे अब कोयले के दाम बढ़ गए हैं." उन्होंने मांग की कि कोल इंडिया को कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला तुरंत वापस लेना चाहिए. भट्टाचार्य ने चेतावनी दी कि "कोयले की कीमत बढ़ने से बिजली की दरें भी बढ़ेंगी, जिसका बोझ आम जनता पर पड़ेगा."
चुनाव के बाद पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने की आशंका
भाजपा को "चुनावी सरकार" बताते हुए सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि केवल चुनाव के कारण 29 अप्रैल तक पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे गए हैं. उन्होंने आशंका जताई कि "चुनाव खत्म होते ही कीमतों में भारी बढ़ोतरी की जाएगी, जिससे केवल बड़े कॉरपोरेट समूहों को फायदा होगा." उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के पास वास्तविक मुद्दों की कमी है, इसलिए वह लगातार भावनात्मक मुद्दे उठा रही है.
गठबंधन और आगामी चुनाव पर दी जानकारी
आगामी चुनाव और उम्मीदवारों की घोषणा में हो रही देरी पर उन्होंने स्पष्ट किया कि "कांग्रेस और ममता बनर्जी सहित अन्य गठबंधन साथियों के साथ बातचीत जारी है, इसी कारण अभी तक प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं की गई है." अंत में उन्होंने असम के मुख्यमंत्री के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें कड़ा जवाब देने की क्षमता केवल हेमंत सोरेन में है. इस प्रेस वार्ता के जरिए जेएमएम ने आगामी चुनाव के लिए अपने आक्रामक रुख के संकेत दे दिए हैं.