Bagbera Water Supply Delay: जमशेदपुर के बागबेड़ा क्षेत्र में जलापूर्ति की समस्या एक अंतहीन इंतजार में तब्दील हो गई है. वर्ष 2015 में जिस "बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना" का शिलान्यास बड़े तामझाम के साथ किया गया था, वह आज 2026 में भी अधर में लटकी हुई है. गौरतलब है कि इसी योजना के साथ शुरू हुई गोविंदपुर जलापूर्ति योजना का कार्य लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन बागबेड़ा के हजारों परिवार आज 11 साल बीत जाने के बाद भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं.
दो बार बदले गए ठेकेदार और करोड़ों की लागत
लगभग "300 करोड़ रुपये" की भारी भरकम लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना की विफलता का मुख्य कारण ठेकेदारों की लापरवाही और प्रशासनिक ढिलाई रही है. इन 11 वर्षों के दौरान योजना को पूरा करने के लिए दो बार ठेकेदार बदले गए. पहले कांट्रेक्टर ने तय समय सीमा के भीतर काम पूरा नहीं किया, जिसके कारण सरकार ने उसे "ब्लैक लिस्ट" (Blacklist) कर दिया था. इसके पश्चात "प्रीति इंटरप्राइजेज" नामक कंपनी को काम का जिम्मा सौंपा गया, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि नए ठेकेदार का काम भी वर्तमान में पूरी तरह ठप पड़ा है.
जनप्रतिनिधियों के ज्ञापन और विभागीय आश्वासन
बागबेड़ा के स्थानीय जनप्रतिनिधि लगातार इस मुद्दे को लेकर मुखर हैं. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग जमशेदपुर के कार्यपालक अभियंता को अब तक दर्जनों बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं. ग्रामीणों का कहना है कि "जब भी विभाग से संपर्क किया जाता है, तो केवल कोरा आश्वासन ही मिलता है." अधिकारियों की उदासीनता के कारण पाइपलाइन बिछाने और जल मीनार निर्माण का कार्य अपनी कछुआ गति से आगे बढ़ रहा है, जिससे जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है.
जून 2026 का नया दावा और धरातल की हकीकत
विभागीय अधिकारियों ने एक बार फिर नया दावा करते हुए कहा है कि "जून 2026 तक" योजना का लाभ हर घर तक पहुंचा दिया जाएगा. हालांकि 11 सालों के कड़वे अनुभव को देखते हुए बागबेड़ा के निवासियों को इस नए वादे पर यकीन करना मुश्किल लग रहा है. अब देखना यह होगा कि जून 2026 में सचमुच लोगों के घरों के नलों से पानी टपकेगा या यह समय सीमा भी पिछले 11 सालों की तरह केवल फाइलों में ही सिमट कर रह जाएगी.