Baharagora: 17 मार्च को News26 ने बहरागोड़ा क्षेत्र में सुवर्णरेखा नदी किनारे एक संदिग्ध लोहे की वस्तु मिलने की खबर प्रसारित की थी। अब शुक्रवार को हुई जांच के बाद यह साफ हो गया है कि वह वस्तु वास्तव में एक जिंदा बम है। इस पुष्टि के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
सुवर्णरेखा नदी तट पर दबा मिला भारी बम
पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड के पानीपड़ा-नागुड़साई इलाके में नदी किनारे बालू और मिट्टी के नीचे यह बम दबा हुआ था। खुदाई के दौरान इसे बाहर निकाला गया। बम का आकार गैस सिलेंडर जैसा बताया जा रहा है, जिस पर “AN-M64 500-LB, American Made, Unexploded (UXO)” लिखा हुआ मिला।
इससे यह स्पष्ट होता है कि यह करीब 227 किलो (500 पाउंड) वजन का अमेरिकी निर्मित शक्तिशाली बम है, जो अभी तक फटा नहीं था।
बालू खनन के दौरान हुआ खुलासा
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को कुछ लोग नदी घाट पर बालू निकालने का काम कर रहे थे। इसी दौरान उनके औजार किसी कठोर धातु से टकराए। शक होने पर जब और गहराई तक खुदाई की गई, तो एक भारी-भरकम सिलेंडरनुमा वस्तु बाहर आई।
शुरुआत में लोग इसे सामान्य धातु का टुकड़ा समझ रहे थे, लेकिन आकार और बनावट देखकर संदेह गहराता गया।
ग्रामीणों में डर और उत्सुकता का माहौल
घटना की जानकारी फैलते ही आसपास के गांवों के लोग मौके पर पहुंचने लगे। इस रहस्यमयी वस्तु को देखकर लोगों के बीच डर के साथ-साथ जिज्ञासा भी देखने को मिली। कई लोगों ने इसे पुराने समय का विस्फोटक होने की आशंका जताई थी, जो अब सच साबित हो गई है।
द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ने की संभावना
स्थानीय लोगों और बुजुर्गों का कहना है कि यह इलाका पहले युद्धकालीन गतिविधियों और हवाई अड्डों से जुड़ा रहा है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि यह बम द्वितीय विश्व युद्ध के समय का हो सकता है।
बताया जा रहा है कि महुलडांगरी के पास एक लड़ाकू विमान के क्रैश होने की घटना भी पहले सामने आई थी। आशंका है कि यह बम उसी विमान से गिरकर नदी की मिट्टी में दब गया होगा।
प्रशासन सतर्क, लोगों को दूर रहने की चेतावनी
बहरागोड़ा थाना प्रभारी शंकर प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि मामले की सूचना उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय लोगों को बम से दूर रहने और किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करने की सख्त हिदायत दी गई है।
बम स्क्वायड और विशेषज्ञ टीम को बुलाया गया
बम को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करने के लिए रांची से बम निरोधक दस्ता बुलाया गया है। साथ ही, कलाईकुंडा एयरबेस के अधिकारियों को भी जांच के लिए पत्र भेजा गया है।
फिलहाल पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया है और किसी को भी बम के पास जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
प्रशासन का कहना है कि विशेषज्ञों की जांच के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा कि बम कितने समय पुराना है और इसे यहां कैसे छोड़ा गया।
हालांकि फिलहाल इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि यह कोई साधारण वस्तु नहीं, बल्कि बेहद खतरनाक और जिंदा बम है, जिससे बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।