US Dollar Vs Indian Rupee: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के बीच भारतीय मुद्रा "रुपया" अपने अब तक के सबसे खराब दौर से गुजर रहा है. शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 82 पैसे की भारी गिरावट के साथ 93.71 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ. इससे पहले बुधवार को यह 92.89 के स्तर पर था. गुरुवार को गुड़ी पड़वा के अवकाश के कारण विदेशी मुद्रा बाजार बंद रहा था, लेकिन शुक्रवार को खुलते ही बाजार ने नकारात्मक संकेतों को तेजी से भुनाया जिससे रुपया पहली बार 93 प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे चला गया.
कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की "डबल मार"
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये में आई इस तेज कमजोरी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि एक मुख्य कारण है. एक्सपर्ट का कहना है कि "मार्केट ने कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों के नकारात्मक असर को काफी तेजी से महसूस किया है." एक्सपर्ट के अनुसार भारत का "इंपोर्ट बिल" (आयात खर्च) काफी बढ़ने की आशंका है, जिससे घरेलू मुद्रा पर दबाव बना रहेगा. आने वाले दिनों में रुपया 93.00 से 94.25 की कमजोर रेंज में कारोबार कर सकता है. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकालने (पूंजी निकासी) ने भी रुपये की स्थिति को और नाजुक बना दिया है.
अगले एक साल में और कमजोर हो सकती है करेंसी
मुद्रा बाजार की चाल पर नजर रखने वाली संस्थाओं ने भविष्य को लेकर भी चिंताजनक अनुमान जताए हैं. एक हालिया रिपोर्ट में एक्सपर्ट का कहना है कि "अगले एक साल में रुपया 6.5 से 7.5 प्रतिशत तक और कमजोर हो सकता है." एक्सपर्ट के मुताबिक यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 90 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहती हैं, तो डॉलर के मुकाबले रुपया "97.5 से 98.9" के स्तर तक भी गिर सकता है. चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ने और वैश्विक अनिश्चितता के चलते तकनीकी रूप से डॉलर के मुकाबले रुपया अभी और दबाव झेल सकता है.
शेयर बाजार में बढ़त, लेकिन तेल की कीमतें चिंताजनक
शुक्रवार को जहां एक ओर रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर था, वहीं शेयर बाजार में मामूली सुधार देखा गया. सेंसेक्स 325 अंक बढ़कर 74,532 पर और निफ्टी 112 अंक बढ़कर 23,114 पर बंद हुआ. हालांकि बाजार के आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशकों ने नेट बेसिस पर 7,558.19 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं. वैश्विक तेल मानक "ब्रेंट क्रूड" का भाव 0.64 प्रतिशत बढ़कर 109.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. एक्सपर्ट का कहना है कि "जियोपॉलिटिकल अस्थिरता कम समय के लिए बाजार की दिशा तय कर रही है, लेकिन रुपये के लिए फिलहाल कोई बड़ा सकारात्मक ट्रिगर नजर नहीं आ रहा है."