Former Minister Controversy: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में तीन साल के लिए निष्कासित कर दिया है. प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने स्पष्ट किया कि अनुशासन समिति की बार-बार चेतावनी के बावजूद योगेंद्र साव सरकार और पार्टी के खिलाफ बयानबाजी कर रहे थे. इस कार्रवाई ने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी को और तेज कर दिया है, खासकर तब जब उनके आवास के ध्वस्तीकरण का मामला पहले से ही चर्चा में है.
मंत्री पद से देना पड़ा था इस्तीफा
यह पहली बार नहीं है जब योगेंद्र साव संकट में फंसे हैं. साल 2014 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन पर नक्सली संगठन चलाने और लेवी वसूली जैसे बेहद गंभीर आरोप लगे थे. उस वक्त की हेमंत सोरेन सरकार में उन्हें अपने मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा था. आरोपों की गंभीरता के कारण उन्हें दिल्ली से गिरफ्तार भी किया गया था और लंबे समय तक जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ा था.
विवादों का लंबा रहा है सफर
जेल जाने के बाद कांग्रेस ने उनका टिकट काटकर उनकी पत्नी को उम्मीदवार बनाया था. इसके अलावा, उन्हें पूर्व में जिला बदर की कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा है. इस बार मुख्यमंत्री और अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के कारण वे फिर से निशाने पर आ गए हैं. जमीन विवाद और अब पार्टी से निष्कासन ने उनकी राजनीतिक जमीन को काफी कमजोर कर दिया है, जिससे उनके समर्थकों में भी असमंजस की स्थिति है.
प्रेस वार्ता में पार्टी ने रखा पक्ष
रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेतृत्व ने साफ कर दिया कि अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी. प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि योगेंद्र साव को सुधरने के कई मौके दिए गए थे, लेकिन उन्होंने पार्टी की मर्यादा का उल्लंघन जारी रखा. अब आवास टूटने और पार्टी से निकाले जाने के बाद योगेंद्र साव के अगले राजनीतिक कदम पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं.