Jharkhand News: केंद्रीय गृह मंत्रालय में सोमवार को एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने की. इस बैठक में झारखंड के मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. बैठक में देश में लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और बढ़ते साइबर अपराध से निपटने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई. केंद्र सरकार ने झारखंड को इन कानूनों को लागू करने के लिए हर संभव तकनीकी और आर्थिक सहयोग देने का भरोसा भी दिया.
नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
बैठक में तीन नए आपराधिक कानून—भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम—के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई. केंद्रीय गृह सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन कानूनों को जमीनी स्तर पर सफलतापूर्वक लागू करने के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है. उन्होंने कहा कि इन कानूनों का उद्देश्य न्याय व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है.
डिजिटल साक्ष्यों के महत्व पर चर्चा
भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत अब ईमेल, सर्वर लॉग, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल माध्यमों से प्राप्त साक्ष्यों को काफी महत्व दिया जा रहा है. बैठक में झारखंड पुलिस की ओर से एक प्रस्तुति भी दी गई, जिसमें बताया गया कि जांच अधिकारियों को तकनीकी रूप से और अधिक प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है.
अब गवाहों के बयान केवल लिखित रूप में ही नहीं, बल्कि वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग के रूप में भी अदालत में प्रस्तुत किए जाएंगे. हालांकि अधिकारियों ने यह भी माना कि इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने में अभी कुछ समय लगेगा. फिलहाल जांच अधिकारियों को बेहतर गुणवत्ता वाले स्मार्टफोन उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे वे घटनास्थल पर ही डिजिटल साक्ष्य एकत्र कर सकें.
साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट पर सख्ती
बैठक में साइबर ठगी और तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” जैसे मामलों पर रोक लगाने के लिए भी रणनीति तैयार की गई. नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से संदिग्ध बैंक खातों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन पर नजर रखी जा रही है.
इसके अलावा साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए झारखंड पुलिस अन्य राज्यों के साथ तकनीकी जानकारी और डेटा का आदान-प्रदान कर रही है.
केंद्र का पूरा सहयोग मिलेगा
केंद्रीय गृह सचिव ने निर्देश दिया कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों में जांच में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की जल्द पहचान और गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए.
केंद्र सरकार ने झारखंड को आश्वासन दिया कि संसाधनों और प्रशिक्षण की कमी को दूर करने के लिए हर स्तर पर सहयोग दिया जाएगा. आने वाले समय में झारखंड पुलिस की कार्यप्रणाली में डिजिटल तकनीक का अधिक इस्तेमाल देखने को मिल सकता है.