राजधानी रांची में आयोजित State Level Bankers Committee की 94वीं बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि किसानों के हित में बैंकिंग क्षेत्र से जिस सक्रियता और प्रतिबद्धता की अपेक्षा है, उसका अभाव देखने को मिल रहा है।
उन्होंने आगामी खरीफ सीजन का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछली बैठक में ही अप्रैल-मई के दौरान किसानों को समय पर केसीसी ऋण उपलब्ध कराने और राशि विमुक्त करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन वर्तमान प्रगति संतोषजनक नहीं है, जिससे किसानों को समय पर ऋण मिलने में कठिनाई हो सकती है।
मंत्री ने निर्देश दिया कि प्रखंड स्तरीय बैंकर्स समिति (बीएलबीसी) की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएं। उन्होंने कहा कि कई प्रखंडों में लंबे समय से बीएलबीसी की बैठकें नहीं हो रही हैं, जो चिंताजनक है। एसएलबीसी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बीएलबीसी वर्ष में निर्धारित बैठकों का आयोजन करें और उनकी रिपोर्ट समय पर उपलब्ध कराएं।
कृषि मंत्री ने किसानों के लिए वित्तीय साक्षरता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों की बैंक शाखाओं में ऐसे कर्मियों की तैनाती की जाए, जिन्हें स्थानीय भाषा का ज्ञान हो, ताकि किसानों को बैंकिंग सेवाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
उन्होंने कहा कि राज्य में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी आय के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में अपना रहे हैं। ऐसे में बैंकों और एसएलबीसी को इस क्षेत्र में निवेश और ऋण वितरण पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।
अंत में मंत्री ने कहा कि एसएलबीसी की बैठकों में लिए गए निर्णयों का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसमें बैंकिंग क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।