Ranchi LSD Drug Bust: रांची पुलिस ने नशे के एक हाईटेक अंतरराष्ट्रीय कारोबार का पर्दाफाश करते हुए दो उच्च शिक्षित छात्रों, कुमार अभिषेक (B.Tech) और अविनाश कुमार मिश्रा (B.Com) को रिमांड पर लिया है. कोतवाली डीएसपी के नेतृत्व में हुई जांच में खुलासा हुआ कि ये आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए "डार्क वेब" का सहारा लेकर नीदरलैंड से खतरनाक एलएसडी (LSD) ड्रग्स मंगवाते थे. पकड़े जाने से बचने के लिए पैसों का लेनदेन पूरी तरह से क्रिप्टोकरेंसी में किया जाता था, ताकि बैंक ट्रांजैक्शन का कोई सुराग न मिल सके.
डाकघर से बरामद हुई ड्रग्स की नई खेप
दो दिनों की पुलिस रिमांड के दौरान हुई कड़ी पूछताछ में आरोपियों ने कबूला कि ड्रग्स की खेप सीधे नीदरलैंड से डाक (By Post) के जरिए आती थी. आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस टीम उन्हें लेकर हेहल उप डाकघर पहुंची, जहां विदेश से भेजी गई एलएसडी ड्रग्स की एक नई खेप बरामद की गई. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि पार्सल पर किसका पता दर्ज था और डाक विभाग के स्तर पर इसमें किसकी लापरवाही या संलिप्तता रही है.
शिक्षित युवाओं का नशे के काले कारोबार में उतरना चिंताजनक
पकड़े गए आरोपियों में से एक इंजीनियरिंग और दूसरा कॉमर्स का छात्र है, जिन्होंने अपनी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल तस्करी का जाल बिछाने में किया. पुलिस के अनुसार, ये छात्र रांची के रईस घरानों और शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले युवाओं को अपना निशाना बनाते थे. एलएसडी जैसी महंगी और घातक ड्रग्स की आपूर्ति शहर के किन-किन इलाकों और "पार्टी सर्कल्स" में की जा रही थी, पुलिस अब उन संपर्कों को खंगालने में जुटी है.
बड़े गिरोह के संपर्कों की तलाश में जुटी रांची पुलिस
पंडरा ओपी क्षेत्र से शुरू हुई इस जांच के तार अब अन्य बड़े ड्रग तस्करों से जुड़ते दिख रहे हैं. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन छात्रों के पीछे कोई बड़ा मास्टरमाइंड है जो इन्हें फंड और डार्क वेब एक्सेस प्रदान कर रहा था. फिलहाल, पुलिस ने ड्रग्स को जब्त कर लिया है और छात्रों के लैपटॉप व मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि उनके ग्राहकों और अन्य सहयोगियों की पहचान की जा सके.