SC On Vande Mataram: सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक और सरकारी कार्यक्रमों में “वंदे मातरम्” को अनिवार्य बनाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि अभी ऐसी कोई कानूनी बाध्यता नहीं है, जिससे किसी नागरिक को इसे गाने के लिए मजबूर किया जा सके.
जस्टिस संजीव खन्ना की अगुवाई वाली बेंच ने क्या कहा
इस मामले की सुनवाई जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने की. सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश केवल “advisory” यानी सलाह के तौर पर हैं, इन्हें बाध्यकारी नहीं माना जा सकता. बेंच ने यह भी कहा कि अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, जहां वंदे मातरम् न गाने पर किसी व्यक्ति को सजा दी गई हो. अदालत ने साफ किया कि जब तक ऐसी स्थिति नहीं बनती, तब तक इस मुद्दे पर दखल देने की जरूरत नहीं है.
याचिकाकर्ता की दलील और केंद्र का पक्ष
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत में दलील दी कि भले ही सरकार ने इसे सलाह के रूप में जारी किया हो, लेकिन इससे लोगों पर अप्रत्यक्ष दबाव बन सकता है. भविष्य में इसे अनिवार्य बनाए जाने की आशंका भी जताई गई. वहीं केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान बढ़ाना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इन दिशा-निर्देशों में कहीं भी दंड या बाध्यता का प्रावधान नहीं है.
‘Premature’ बताकर याचिका को किया खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को “premature” यानी समय से पहले दायर बताया. अदालत ने कहा कि केवल संभावनाओं या आशंकाओं के आधार पर किसी नीति को चुनौती नहीं दी जा सकती. कोर्ट का मानना था कि जब तक किसी नागरिक के अधिकारों का वास्तविक उल्लंघन नहीं होता, तब तक न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है.
दरअसल, केंद्र सरकार ने हाल ही में “वंदे मातरम्” को लेकर कुछ प्रोटोकॉल जारी किए थे. इनमें बताया गया था कि किन मौकों पर और किस तरह इसे गाया या बजाया जा सकता है.
इन्हीं दिशा-निर्देशों को आधार बनाकर यह याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें आशंका जताई गई कि इसे आगे चलकर अनिवार्य किया जा सकता है.
कोर्ट का संतुलित संदेश
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि
राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान जरूरी है
लेकिन व्यक्तिगत स्वतंत्रता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. यानी, “वंदे मातरम्” का सम्मान करना जरूरी है, लेकिन इसे गाना हर व्यक्ति की अपनी इच्छा पर निर्भर करेगा.