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  • 2026-03-31

Jharkhand Budget Closing: बजट का आखिरी दिन, झारखंड के 1.45 लाख करोड़ को खर्च करने की सरकारी विभागों में मची होड़

Jharkhand Budget Closing: झारखंड के तमाम सरकारी दफ्तरों और मंत्रालयों में आज सुबह से ही सांसें थमी हुई हैं. मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-26 का आज अंतिम दिन है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार के लिए यह दिन किसी कड़े इम्तिहान से कम नहीं है. सरकार के पास आवंटित किए गए विशालकाय बजट को ठिकाने लगाने या फाइलों में समेटने के लिए आज रात 12 बजे तक का ही वक्त बचा है. अगर तय समय सीमा के भीतर इस भारी-भरकम सरकारी राशि का उपयोग नहीं किया गया या इसे सरेंडर नहीं किया गया, तो यह पूरा पैसा हमेशा के लिए लैप्स (शून्य) हो जाएगा.

दफ्तरों में फाइलों का अंबार और ठेकेदारों की धड़कनें तेज
नियमों के कड़े पहरे के बीच राजधानी रांची समेत राज्य के सभी कोषागारों (ट्रेजरी) में फाइलों और बिलों का सैलाब आ गया है. सरकारी बाबू और अधिकारी चाय की चुस्कियों के बीच कंप्यूटर स्क्रीन्स पर उंगलियां दौड़ा रहे हैं ताकि विकास कार्यों से जुड़े ठेकेदारों के भुगतान और अन्य सरकारी योजनाओं के बिलों को समय रहते हरी झंडी दी जा सके. आर्थिक जानकारों का मानना है कि झारखंड जैसे आदिवासी बहुल और विकासशील राज्य के लिए कुल आवंटित बजट का 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा सही जगह और सही समय पर खर्च कर पाना अपने आप में एक बहुत बड़ा कीर्तिमान होता है.

मंईयां सम्मान योजना ने मारी बाजी, कुछ विभाग फिसड्डी साबित हुए
अगर अलग-अलग विभागों के रिपोर्ट कार्ड पर नजर डालें, तो महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपनी फ्लैगशिप “मंईयां सम्मान योजना” के जरिए सबको पीछे छोड़ दिया है. इस विभाग ने अपने 22,138.90 करोड़ रुपये के भारी बजट में से लगभग 19,913.77 करोड़ रुपये सीधे जरूरतमंद महिलाओं के बैंक खातों तक पहुंचाकर रिकॉर्ड कायम किया है. दूसरी तरफ, परिवहन विभाग (162 करोड़ में से मात्र 44 करोड़), खान विभाग (364 करोड़ में से मात्र 118 करोड़) और श्रम विभाग (1,993 करोड़ में से केवल 956 करोड़) जैसे कई विभाग इस बार खर्च के मामले में बेहद सुस्त और फिसड्डी साबित हुए हैं.

आज की क्लोजिंग रिपोर्ट तय करेगी अगले वित्तीय वर्ष का भविष्य
झारखंड सरकार ने समावेशी विकास का नारा देते हुए इस बार पूंजीगत व्यय (इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च) में 18 फीसदी की बढ़ोतरी का बड़ा सपना देखा था. लेकिन स्वास्थ्य, जल संसाधन और पेयजल जैसे बड़े महकमों में जमीनी स्तर पर काम लटके रहने की वजह से करोड़ों रुपये की भारी-भरकम राशि लैप्स होने की कगार पर खड़ी है. हेमंत सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष (2026-27) के लिए पहले ही 1.58 लाख करोड़ रुपये का नया ऐतिहासिक बजट घोषित कर रखा है, लेकिन उस नए बजट की असल रीढ़ और कामयाबी आज रात निकलने वाली फाइनल क्लोजिंग रिपोर्ट पर ही टिकी हुई है.
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