Jharkhand Politics: झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन के दो प्रमुख घटक दलों यानी कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बीच क्या सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है? यह सवाल प्रदेश की सियासत में तेजी से तैरने लगा है. झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी के. राजू ने राज्य की कानून-व्यवस्था (विधि-व्यवस्था) पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि इस ज्वलंत मुद्दे पर बहुत जल्द मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आमने-सामने बातचीत होगी. चूंकि मुख्यमंत्री अभी असम के चुनावी दौरे पर व्यस्त हैं, इसलिए माना जा रहा है कि असम चुनाव खत्म होने के बाद ही दोनों सहयोगियों के बीच इस अहम मुद्दे पर गंभीर चर्चा की मेज सजेगी.
“सांप” वाले तीखे बयान पर पल्ला झाड़ा, वित्त मंत्री ने दी सफाई
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सबसे ज्यादा असहज करने वाला सवाल तब आया जब मीडियाकर्मियों ने झामुमो के एक बड़े नेता द्वारा कांग्रेस को कथित तौर पर “सांप” कहे जाने वाले बयान पर के. राजू की प्रतिक्रिया मांगी. इस बेहद संवेदनशील और विवादित मुद्दे पर प्रदेश प्रभारी ने सीधे तौर पर कुछ भी बोलने से परहेज किया और मौन साध लिया. हालांकि, उन्होंने इतना जरूर स्पष्ट किया कि कांग्रेस अब तमाम असहज करने वाले मुद्दों पर सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से ही बात करेगी. वहीं, बगल में बैठे प्रदेश के कद्दावर कांग्रेस नेता और वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने डैमेज कंट्रोल करते हुए सफाई दी कि झामुमो महासचिव ने “सांप” का उदाहरण दरअसल भाजपा (BJP) को घेरने के लिए दिया था, न कि अपनी ही सहयोगी कांग्रेस के लिए.
माइनिंग माफिया और अफसरों के खिलाफ कांग्रेस का उग्र आंदोलन रहेगा जारी
राज्य में अपनी ही साझीदार सरकार होने के बावजूद के. राजू ने कड़े तेवर अपनाते हुए कहा कि झारखंड में माइनिंग माफिया और बेलगाम जिला प्रशासन के खिलाफ कांग्रेस का उग्र आंदोलन लगातार जारी रहेगा. उन्होंने राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर भी करारा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों में अच्छी पढ़ाई नहीं हो रही है और सूबे में करीब 70 हजार शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं. उन्होंने जल्द से जल्द समन्वय समिति और 20 सूत्री कमेटियों के गठन की पुरजोर मांग की. दिलचस्प बात यह रही कि कांग्रेस का यह पूरा हमला सिर्फ बीडीओ, थानेदार, डीएसपी और एसपी जैसे अधिकारियों तक ही सीमित रहा, उन्होंने सीधे तौर पर सरकार या उसके मुखिया पर कोई व्यक्तिगत छींटाकशी नहीं की.
असम में गठबंधन न होने और राज्यसभा चुनाव के गणित पर साधी चुप्पी
असम विधानसभा चुनाव में झामुमो और कांग्रेस के बीच चुनावी गठबंधन नहीं हो पाने के तीखे सवाल पर के. राजू ने कहा कि अब उस गड़े मुर्दे को उखाड़ने या बातचीत करने का कोई मतलब नहीं है. आने वाले दिनों में दोनों दलों के प्रदर्शन के आधार पर ही आगे की रणनीति तय होगी. वहीं, झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर भी उन्होंने चुप्पी साधे रखी. गौरतलब है कि महागठबंधन को दोनों सीटें जीतने के लिए 54 से अधिक मतों की आवश्यकता होगी, जबकि आईएनडीआईए (I.N.D.I.A.) गठबंधन के पास झामुमो (34), कांग्रेस (16), राजद (4) और माले (2) को मिलाकर प्रथम वरीयता के कुल 56 मत मौजूद हैं.