Amravati As New Capital: आंध्र प्रदेश के लिए लंबे समय से चली आ रही राजधानी की अनिश्चितता अब खत्म होने की ओर है. लोकसभा ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2026 को स्वीकृति दे कर अमरावती को राज्य की स्थायी और एकमात्र राजधानी बनाने का रास्ता साफ कर दिया है. इस फैसले को राज्य के भविष्य से जुड़ा अहम कदम माना जा रहा है.
लोकसभा में पास हुआ संशोधन बिल
यह बिल केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में पेश किया था. इस पर एक घंटे से अधिक समय तक चर्चा और तीखी बहस हुई, जिसके बाद इसे वॉयस वोट के जरिए मंजूरी दे दी गई. बिल को अधिकांश राजनीतिक दलों का समर्थन मिला, लेकिन वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने इसका विरोध करते हुए सदन से निकलर अपनी उपस्थिति नही दी.
पुराने कानून में बदलाव कर मिला स्पष्ट समाधान
यह संशोधन आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014 की धारा 5 से जुड़ा है. पहले इस कानून के तहत हैदराबाद को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की संयुक्त राजधानी के रूप में सीमित अवधि के लिए रखा गया था. हालांकि, स्थायी राजधानी को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था. अब इस संशोधन के जरिए अमरावती को राज्य की स्थायी राजधानी घोषित करने की कानूनी व्यवस्था कर दी गई है.
विपक्ष ने किसानों के मुद्दे पर जताई चिंता
वाईएसआर कांग्रेस के सांसदों ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि अमरावती परियोजना के लिए जमीन देने वाले किसानों के हितों को लेकर स्पष्ट समयसीमा तय नहीं की गई है. पार्टी का कहना है कि इन किसानों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए ठोस रोडमैप जरूरी है, जो इस बिल में स्पष्ट रूप से नहीं दिखता.
राजनीतिक बयानबाजी भी रही तेज
बहस के दौरान विभिन्न नेताओं ने अपने-अपने पक्ष रखे. कुछ सांसदों ने इसे राज्य के विकास के लिए जरूरी कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसे अधूरा फैसला करार दिया.इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली.
12 साल लंबे इंतजार के बाद आंध्र प्रदेश को मिली राजधानी की स्पष्टता
आंध्र प्रदेश के पुनर्गठन के बाद से ही नई राजधानी को लेकर लगातार असमंजस की स्थिति बनी हुई थी. अब इस बिल के पास होने के बाद अमरावती को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है.
यह फैसला प्रशासनिक स्थिरता और विकास कार्यों को गति देने में मददगार माना जा रहा है.
लोकसभा से पास हुआ यह संशोधन बिल आंध्र प्रदेश के लिए एक बड़ा निर्णय है. अब अमरावती को स्थायी राजधानी के रूप में विकसित करने की दिशा में काम तेज होने की उम्मीद है, हालांकि किसानों और स्थानीय मुद्दों को लेकर बहस अभी जारी है.