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  • 2026-04-03

Kharkai River Pollution: दम तोड़ती खरकई नदी, कचरे के ढेर और जहर बनते पानी से जलीय जीव संकट में, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

Kharkai River Pollution: आदित्यपुर स्थित खरकई ब्रिज से खरकई नदी में धड़ल्ले से फेंके जा रहे कचरे ने इस पावन नदी के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा कर दिया है. लगातार डंप हो रहे कचरे के कारण नदी का जल पूरी तरह दूषित और जहरीला हो चुका है. पुल के ऊपर से बेधड़क प्लास्टिक, घरेलू अपशिष्ट और औद्योगिक कचरा नीचे फेंका जा रहा है, जिससे जलीय जीवन पूरी तरह नष्ट होने की कगार पर पहुंच गया है. स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि स्वच्छ जल का यह बड़ा स्रोत अब एक बड़े नाले में तब्दील होता जा रहा है. इस गंभीर पर्यावरणीय संकट पर तत्काल अंकुश लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह लाचार और असफल नजर आ रहा है.

औद्योगिक अपशिष्ट और सीवरेज ने बिगाड़ी सूरत
पर्यावरणविदों और जानकारों का मानना है कि केवल पुल से फेंका जाने वाला कचरा ही नहीं, बल्कि आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले जहरीले रासायनिक अपशिष्ट और शहर का अनट्रीटेड सीवरेज (गंदा पानी) सीधे नदी में गिर रहा है. इस केमिकल युक्त और गंदे पानी ने नदी के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को पूरी तरह तबाह कर दिया है. नदी में रहने वाले जीव-जंतुओं और मछलियों की संख्या लगातार घटती जा रही है. प्रदूषण का यह बढ़ता स्तर न केवल पर्यावरण के लिए खतरनाक है, बल्कि इसके किनारे रहने वाले हजारों लोगों के स्वास्थ्य और भूगर्भ जल (Groundwater) पर भी बेहद बुरा प्रभाव डाल रहा है.

डीसी नीतीश कुमार सिंह से प्रभावी कदम उठाने की मांग
खरकई नदी की इस बदहाली को देखते हुए अब जिले के जागरूक नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. स्थानीय लोगों की मांग है कि जिले के उपायुक्त (DC) नीतीश कुमार सिंह को इस बेहद संवेदनशील मामले में खुद हस्तक्षेप करना चाहिए. प्रशासन को खरकई ब्रिज के किनारे लोहे की ऊंची जालियां लगाने, सीसीटीवी कैमरे लगाने और कचरा फेंकने वालों पर भारी जुर्माना लगाने जैसे सख्त दंडात्मक कदम उठाने की जरूरत है. इसके साथ ही, नदियों में गिरने वाले औद्योगिक कचरों और सीवरेज के वैज्ञानिक निपटान के लिए तत्काल प्रभावी और स्थाई व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए.

नदी बचाने के लिए आम जनता को भी आना होगा आगे
प्रशासनिक सख्ती के अलावा खरकई नदी को बचाने के लिए खुद आदित्यपुर और जमशेदपुर के प्रबुद्ध शहरवासियों को भी आगे आना होगा. जनभागीदारी के बिना किसी भी नदी को प्रदूषण मुक्त नहीं रखा जा सकता. जिलेवासियों को यह संकल्प लेना होगा कि वे न तो खुद नदी में किसी भी प्रकार की गंदगी या पूजन सामग्री प्रवाहित करेंगे और न ही दूसरों को ऐसा करने देंगे. हमें समझना होगा कि पर्यावरण की रक्षा ही हमारा भविष्य सुरक्षित कर सकती है. यदि अब भी हम सजग नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियों को केवल सूखी और जहरीली नदियां ही विरासत में मिलेंगी.
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