Bokaro: जिले में सामने आए कोषागार घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, गबन की रकम भी लगातार बढ़ती जा रही है। शुरुआत में यह राशि करीब 3 करोड़ 15 लाख बताई गई थी, जो बाद में 4 करोड़ 29 लाख 71 हजार तक पहुंची और अब जांच में यह आंकड़ा 6 करोड़ रुपये से अधिक होने के संकेत मिल रहे हैं। इस बड़े खुलासे के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और मामले को बहुत ही गंभीरता से लिया जा रहा है।
लेखाकार की गिरफ्तारी, अवैध निकासी का आरोप
इस मामले में झारखंड पुलिस विभाग के लेखाकार कौशल कुमार पाण्डेय को बोकारो पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने कोषागार से वेतन मद की करोड़ों की राशि को अवैध तरीके से निकालकर अपनी पत्नी और अन्य सहयोगियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया। यह गड़बड़ी मुख्य रूप से वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान की गई, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
उपायुक्त के निर्देश पर FIR, खातों पर लगी रोक
मामले का खुलासा होने के बाद बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा ने सख्त रुख अपनाते हुए जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके निर्देश पर कोषागार अधिकारी गुलाब चंद उरांव ने बोकारो स्टील सिटी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। इसके साथ ही जिन बैंक खातों में गबन की राशि भेजी गई थी, उन पर तत्काल रोक लगा दी गई है। साथ ही कोषागार कार्यालय से जुड़े सभी दस्तावेज जब्त कर जांच शुरू कर दी गई है।
कई नाम आए सामने, सिंडिकेट की आशंका
प्रारंभिक जांच में राम नरेश सिंह, उपेंद्र सिंह और एस कुमार सहित कई अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि फर्जी तरीके से इन लोगों के नाम पर निकासी की गई। पुलिस उपाधीक्षक आलोक रंजन के अनुसार, एक उपनिरीक्षक के नाम पर भी राशि निकाले जाने के संकेत मिले हैं, जो सामान्य वेतन प्रक्रिया से मेल नहीं खाता। इससे पूरे मामले में एक बड़े सिंडिकेट के सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है।
जांच के लिए टीम गठित, सख्त कार्रवाई का भरोसा
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला स्तर पर उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया है, वहीं राज्य स्तर पर भी समानांतर जांच जारी है। अतिरिक्त कलेक्टर एमडी मुमताज अंसारी ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए कहा कि हर पहलू की गहराई से जांच की जा रही है।
दोषियों को नहीं मिलेगी राहत, राशि रिकवरी की तैयारी
उपायुक्त अजय नाथ झा ने साफ कहा है कि इस मामले में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन गबन की गई राशि की जल्द से जल्द रिकवरी करने की दिशा में काम कर रहा है। साथ ही जांच पूरी होने के बाद सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।