Garbage Dumping Issue: आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड 23 में नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए कचरा डंपिंग यार्ड ने हजारों लोगों का जीना दूभर कर दिया है. रिहायशी इलाके में जमा कचरे के पहाड़ से निकलने वाला जहरीला रिसाव अब भूगर्भ जल में मिल रहा है, जिससे कैंसर, किडनी फेलियर और टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. हवा में मौजूद मीथेन गैस के कारण बुजुर्गों और बच्चों को सांस लेने में भारी दिक्कत हो रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम “स्वच्छ भारत अभियान” के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है, जबकि धरातल पर स्थिति जानलेवा बनी हुई है.
नियमों की धज्जियां और प्रशासन की चुप्पी
यह डंपिंग यार्ड “सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016” का खुला उल्लंघन है, जो स्पष्ट रूप से रिहायशी क्षेत्रों से दूर कचरा निस्तारण का निर्देश देता है. वार्ड पार्षद से लेकर मेयर और उपायुक्त तक शिकायत करने के बावजूद डंपिंग बंद नहीं हुई है. ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कर नगर निगम अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा है, जिससे प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता साफ झलकती है. वैज्ञानिक निस्तारण के अभाव में यह क्षेत्र अब किसी बड़ी त्रासदी या महामारी के मुहाने पर खड़ा है.
अब आर-पार के मूड में जनता, सोशल मीडिया पर छेड़ी मुहिम
प्रशासनिक अनदेखी से आक्रोशित निवासियों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है. स्थानीय लोग अब न केवल कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी कर रहे हैं, बल्कि जन-आंदोलन की राह पर भी निकल पड़े हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “एक्स” (ट्विटर) पर नगर निगम के खिलाफ वीडियो वायरल कर अधिकारियों को घेरने की योजना बनाई गई है. निवासियों ने दो टूक कहा है कि यदि जल्द ही डंपिंग बंद नहीं हुई और कचरे का वैज्ञानिक तरीके से हटाया नहीं गया, तो किसी भी अनहोनी की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर नगर निगम प्रशासन की होगी.