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  • 2026-04-11

Dacoit Film Review: दमदार कहानी का अधूरा खेल, कई मुद्दों के बोझ तले दब गई फिल्म

Dacoit Film Review: Dacoit एक अलग और दिलचस्प आइडिया के साथ सिनेमाघरों में उतरी है, लेकिन स्क्रीन पर यह फिल्म अपनी ही कहानी में उलझती नजर आती है. अदिवि शेष और मृणाल ठाकुर की मौजूदगी के बावजूद फिल्म न तो पूरी तरह थ्रिल देती है और न ही भावनात्मक जुड़ाव बना पाती है. 
जेल से भागने से शुरू होती कहानी, अस्पताल डकैती तक पहुंचती प्लॉटलाइन
फिल्म की शुरुआत साल 2021 से होती है, जहां हरि जेल से भागने की कोशिश करता है. उसकी जिंदगी में मोड़ तब आता है जब उसकी प्रेमिका सरस्वती उसके खिलाफ गवाही देती है. जेल से बाहर आने के बाद हरि को पता चलता है कि सरस्वती अब शादीशुदा है और उसका पति गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है, जहां किडनी ट्रांसप्लांट के लिए भारी रकम की जरूरत है. यहीं से कहानी एक अस्पताल में डकैती की योजना तक पहुंचती है, जिसमें हरि सरस्वती को अपने साथ शामिल करता है. यह प्लॉट सुनने में रोमांचक लगता है, लेकिन स्क्रीन पर उतना असरदार नहीं बन पाता.

कई मुद्दों को जोड़ने की कोशिश, लेकिन कहानी भटकती रही
फिल्म में जात-पात, सामाजिक असमानता, एकतरफा प्रेम, भ्रष्ट सिस्टम और मेडिकल माफिया जैसे कई गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं. लेकिन समस्या यह है कि फिल्म इन सभी मुद्दों को एक साथ पकड़ने की कोशिश में किसी एक पर भी मजबूत पकड़ नहीं बना पाती. हरि और सरस्वती की प्रेम कहानी भी कमजोर लगती है, क्योंकि उनके रिश्ते की गहराई को ठीक से स्थापित नहीं किया गया.

पुलिस ट्रैक और सपोर्टिंग किरदार कहानी को मजबूत करने में नाकाम
फिल्म में एक महिला पुलिस अधिकारी का ट्रैक भी जोड़ा गया है, जो अपने पिता से केस में मदद मांगती नजर आती है. हालांकि, यह पूरा ट्रैक कहानी में खास योगदान नहीं देता और कई जगह अनावश्यक भी लगता है. कुछ किरदार ऐसे हैं, जिनकी मौजूदगी फिल्म के प्रभाव को बढ़ाने के बजाय कम कर देती है.

धीमी रफ्तार और कमजोर क्लाइमैक्स ने बिगाड़ा पूरा असर
इंटरवल के बाद फिल्म में कुछ ट्विस्ट जरूर आते हैं, लेकिन धीमी गति के कारण उनका असर कम हो जाता है.
क्लाइमैक्स भी बनावटी और जल्दबाजी में खत्म होता हुआ महसूस होता है. दर्शक जिस भावनात्मक या थ्रिलिंग अंत की उम्मीद करता है, वह यहां नहीं मिल पाता.

तकनीकी पक्ष ठीक, लेकिन एडिटिंग और म्यूजिक फीका
सिनेमेटोग्राफी फिल्म के माहौल को ठीक तरीके से दिखाती है, लेकिन एडिटिंग में कसावट की कमी साफ नजर आती है. फिल्म की लंबाई भी इसकी गति को प्रभावित करती है. गाने और बैकग्राउंड म्यूजिक भी कुछ खास असर नहीं छोड़ते.

Dacoit एक ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसमें दमदार फिल्म बनने की पूरी संभावनाएं थीं. लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले, बिखरी हुई कहानी और धीमी रफ्तार ने इसे औसत बना दिया.
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