BREAKING: रांची के कांके स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन में सरकारी खजाने की लूट का बड़ा मामला उजागर हुआ है। जांच में सामने आया है कि संस्थान के दो कर्मियों ने वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच "कुबेर पोर्टल" और वेतन बिलों में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की। आरोपियों ने दस्तावेजों में हेरफेर कर और फर्जी बिल तैयार कर ट्रेजरी के माध्यम से लगभग 3 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की। इस घोटाले की पुष्टि के बाद कोतवाली थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है और पुलिस ने दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है।
अकाउंटेंट और सहकर्मी के खातों में गए करोड़ों
जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे खेल के मुख्य किरदार अकाउंटेंट मुनिन्द्र कुमार और संजीव कुमार हैं। गबन की गई राशि का एक बड़ा हिस्सा सीधे इनके व्यक्तिगत बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। अकाउंटेंट मुनिन्द्र कुमार पर अपने दो खातों में लगभग 1.52 करोड़ रुपये और संजीव कुमार के खाते में 1.41 करोड़ रुपये भेजने का पुख्ता आरोप है। आरोपियों ने अपने वेतन को सॉफ्टवेयर में गलत तरीके से बढ़ाकर दिखाया और निर्धारित सीमा से कहीं अधिक रकम सरकारी खजाने से उड़ा ली।
67 पन्नों की रिपोर्ट में पुख्ता सबूत
घोटाले की भनक लगते ही रांची डीसी के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम गठित की गई थी। टीम ने 13 अप्रैल को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी, जिसमें 67 पन्नों के दस्तावेजी साक्ष्य शामिल हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि नियमों को ताक पर रखकर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया। कार्यकारी मजिस्ट्रेट मो. जफर हसनात के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर विभागीय दस्तावेजों को जब्त कर लिया है। पुलिस अब इन खातों के ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और अन्य तकनीकी पहलुओं की गहराई से पड़ताल कर रही है।
विभागीय मिलीभगत की भी जांच
इस घोटाले ने जिला कोषागार और विभाग की निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और प्रशासन इस बात की जांच कर रहे हैं कि इतने लंबे समय तक करोड़ों की हेराफेरी वरिष्ठ अधिकारियों की नजरों से कैसे बची रही। हिरासत में लिए गए कर्मियों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गबन में विभाग के कुछ और बड़े नाम तो शामिल नहीं हैं। फिलहाल, पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां संभव हैं।