Jharkhand News: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमाओं पर सक्रिय कोयला तस्करी और मनी लाउंड्रिंग नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचते हुए विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है. जांच में सामने आया है कि पिछले पांच वर्षों में जबरन वसूली और “गुंडा टैक्स” के जरिए 650 करोड़ रुपये से अधिक की काली कमाई की गई है. यह सिंडिकेट न केवल बंगाल के दुर्गापुर-आसनसोल बेल्ट में सक्रिय था, बल्कि झारखंड से होने वाली अवैध कोयला तस्करी को भी नियंत्रित कर रहा था.
25 प्रतिशत तक वसूला जाता था “गुंडा टैक्स”
ED की चार्जशीट के मुताबिक, यह सिंडिकेट वैध डिलीवरी ऑर्डर (DO) धारकों, ट्रांसपोर्टरों और व्यापारियों से 275 रूपए प्रति टन से लेकर 1,500 रूपए प्रति टन तक की रंगदारी वसूलता था. यह राशि कोयले के वास्तविक मूल्य का लगभग 20-25 प्रतिशत हिस्सा होती थी. जो व्यापारी इस “गुंडा टैक्स” (GT) को देने से इनकार करते थे, उन्हें खदानों से कोयला उठाने और परिवहन करने से रोक दिया जाता था. इस अवैध दबाव के कारण ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) को भी भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा.
अधिकारियों और रसूखदारों को पहुंचती थी घूस
जांच में यह बात भी प्रमुखता से उभरी है कि झारखंड से होने वाली कोयले की अवैध आवाजाही को संरक्षण देने के लिए सिंडिकेट ने कई सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक रसूखदारों को मोटी रिश्वत पहुंचायी थी. उगाही गई रकम को बैंकिंग सिस्टम की नजरों से बचाने के लिए कई मुखौटा (Shell) कंपनियों और प्रोप्राइटरशिप फर्मों के जरिए घुमाया गया ताकि इसे वैध निवेश के रूप में दिखाया जा सके. मनी लाउंड्रिंग के इस जाल में कई सफेदपोशों के नाम भी सामने आने की संभावना है.
“लाला पैड” के जरिए चलता था समानांतर प्रशासन
अवैध कोयला संचालन और रंगदारी की वसूली के लिए सिंडिकेट “लाला पैड” नामक एक विशेष टोकन या इनवॉइस प्रणाली का उपयोग करता था. फिलहाल, ED इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य कड़ियों और झारखंड में इसके स्थानीय मददगारों की तलाश में जुटी है.