Tata Steel Wage Revision: टाटा स्टील में वेज रिवीजन (वेतन संशोधन) को लेकर गुरुवार को प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच महत्वपूर्ण वार्ता हुई. इस बैठक में प्रबंधन की ओर से सीएचआरओ जुबिन पालिया मौजूद थे, जबकि यूनियन का नेतृत्व अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु, डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह और महामंत्री सतीश सिंह ने किया. हालांकि इस वार्ता को गोपनीय रखा गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार मुख्य चर्चा का केंद्र एनएस (NS) ग्रेड के कर्मचारियों का वेतन ढांचा रहा.
एनएस ग्रेड और डीए पर विस्तार से मंथन
बैठक के दौरान एनएस ग्रेड के कर्मचारियों के “डीए प्वाइंट” पर विस्तार से चर्चा की गई. यूनियन प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों की उन चिंताओं को प्रमुखता से रखा, जो वेतन वृद्धि और भत्तों से जुड़ी हैं. विशेष रूप से नए ग्रेड के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) के कैलकुलेशन और उनके वर्तमान वेतन ढांचे में सुधार को लेकर बातचीत हुई है. प्रबंधन और यूनियन दोनों ही एक ऐसे फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं जो सभी पक्षों के लिए संतोषजनक हो.
2012 के पैटर्न की उठ रही है मांग
एनएस ग्रेड के कर्मचारियों के बीच पिछली गलतियों को न दोहराने की पुरजोर मांग है. कर्मचारी साल 2012 के समझौते के पैटर्न पर नया समझौता चाहते हैं और वे 2012 व 2018 के समझौतों की लगातार तुलना कर रहे हैं. कर्मचारियों का तर्क है कि नए पैटर्न में एमजीबी (MGB) स्केल शामिल न होने की वजह से उनके बेसिक वेतन और वार्षिक इंक्रीमेंट पर बुरा असर पड़ा है. कमेटी मेंबरों के अनुसार, 23 फीसदी एमजीबी मिलने के बावजूद पुराने पैटर्न के मुकाबले प्रतिमाह नुकसान हो रहा है.
वेतन विसंगतियों को दूर करने पर जोर
कर्मचारियों ने शिकायत की है कि एनएस-1 और एनएस-7 ग्रेड में बेसिक वेतन मार्केट और पुराने ग्रेड के मुकाबले हजारों रुपये कम है. साथ ही डीए शून्य करने और एफडीए (FDA) घटाने को भी आर्थिक नुकसान का बड़ा कारण बताया गया है. वेज रिवीजन की इस प्रक्रिया में इन तमाम विसंगतियों को दूर करना यूनियन के लिए बड़ी चुनौती है. आने वाले दौर की वार्ताओं में एमजीबी और बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी पर अंतिम फैसला होने की उम्मीद है.