राज्यपाल के आदेश से जारी इस अधिसूचना में कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को बदला गया है, वहीं कई वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। इससे पहले दिन में आईएएस अधिकारियों का भी बड़े पैमाने पर ट्रांसफर किया गया था।
वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी
इस फेरबदल में वरिष्ठ अधिकारियों को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं।
मनोज कौशिक (2001 बैच) अब अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के एडीजी के साथ-साथ एडीजी मुख्यालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे।
पंकज कम्बोज (2005 बैच) को झारखंड पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के एमडी के साथ आईजी मानवाधिकार की जिम्मेदारी दी गई है।
नरेन्द्र कुमार सिंह (2006 बैच) को आईजी अभियान बनाया गया है और उन्हें आईजी पलामू का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।
इन जिलों को मिले नए एसपी
राज्य के कई जिलों में नए पुलिस कप्तानों की तैनाती की गई है—
हजारीबाग में अमन कुमार, देवघर में प्रवीण पुष्कर, बोकारो में नाथू सिंह मीणा, पलामू में कपिल चौधरी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वहीं, निधि द्विवेदी को सरायकेला-खरसावां का नया एसपी बनाया गया है।
रामगढ़ में मुकेश कुमार लुनायत, जामताड़ा में शम्भू कुमार सिंह, पाकुड़ में अनुदीप सिंह, गढ़वा में आशुतोष शेखर और खूंटी में ऋषभ गर्ग को नई तैनाती मिली है।
इसके अलावा सुमित कुमार अग्रवाल को एसीबी और राजकुमार मेहला को एटीएस का एसपी बनाया गया है।
आईजी स्तर पर भी बदलाव
आईजी स्तर पर भी महत्वपूर्ण फेरबदल हुआ है।
शैलेन्द्र कुमार सिन्हा को पलामू से स्थानांतरित कर बोकारो का आईजी बनाया गया है।
माईकेलराज एस को आईजी रेल, सुनील भाष्कर को आईजी झारखंड सशस्त्र पुलिस (JAP) और क्रांति कुमार गेड़िदेशी को आईजी निगरानी-सह-सुरक्षा (विद्युत बोर्ड) की जिम्मेदारी दी गई है।
नए एसडीपीओ की तैनाती
कई प्रशिक्षु और सहायक पुलिस अधीक्षकों को भी नई जिम्मेदारी दी गई है।
दिव्यांश शुक्ला को हुसैनाबाद, राघवेन्द्र शर्मा को पतरातू और सैयद मुस्तफा हासमी को चक्रधरपुर का एसडीपीओ बनाया गया है।
वहीं, निखिल राय को रांची कोतवाली में एएसपी के रूप में तैनात किया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा और सभी अधिकारियों को अपने नए पदस्थापन स्थल पर जल्द से जल्द योगदान देने का निर्देश दिया गया है।
जांच पर सरकार सख्त
गौरतलब है कि राज्य में ट्रेजरी घोटाले की जांच को लेकर वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर पहले ही सख्त निर्देश दे चुके हैं। ऐसे में इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल को शासन-प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।