Jamshedpur: जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में सुविधाओं के नाम पर भारी भेदभाव देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर कुलपति (VC) के चैंबर में एसी, ठंडा पानी और तमाम लग्जरी सुविधाएं मौजूद हैं, वहीं दूसरी ओर सामान्य कक्षाओं में छात्राएं बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही हैं। चिलचिलाती गर्मी और बिजली की अनियमित कटौती ने परीक्षा देना भी दूभर कर दिया है। बिना पंखे के गर्म कमरों में बैठकर परीक्षा देना छात्राओं के लिए किसी सजा से कम नहीं है। जनरेटर जैसी बुनियादी सुविधा न होने के कारण बिजली कटने पर लिफ्ट में फंसने का डर हमेशा बना रहता है, जो प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
गंदे टॉयलेट और दरकती दीवारें
विश्वविद्यालय परिसर की स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। टॉयलेट में गंदगी का अंबार और भीषण दुर्गंध के कारण छात्राओं में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। विडंबना यह है कि करीब 89 करोड़ रुपये की भारी लागत से बनी इस नई इमारत की दीवारों में अभी से दरारें आने लगी हैं और कई जगहों से प्लास्टर झड़ रहा है। एक विशेष महिला विश्वविद्यालय होने के बावजूद यहां सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन जैसी सुविधा भी नदारद है, जो छात्राओं के स्वास्थ्य और गरिमा के साथ सीधा समझौता है।
नारों और हकीकत के बीच फंसा भविष्य
विश्वविद्यालय की बदहाली को लेकर अब राजनीतिक नेतृत्व पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय विधायक पूर्णिमा साहू, जो इन दिनों महिला आरक्षण बिल को लेकर बढ़-चढ़कर नारेबाजी कर रही हैं, उन्हें छात्राओं ने जमीनी हकीकत देखने की चुनौती दी है। छात्राओं का कहना है कि विधायक को एक बार इस विश्वविद्यालय का भ्रमण जरूर करना चाहिए, ताकि उन्हें पता चले कि जिन बेटियों के आगे बढ़ने के नारे लगाए जा रहे हैं, वे किन नारकीय हालातों में पढ़ने को मजबूर हैं। केवल मंचों से भाषण देने से नहीं, बल्कि इन बुनियादी कमियों को दूर करने से ही बेटियां असल मायनों में आगे बढ़ पाएंगी।
शानदार इमारत, लेकिन भीतर व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमराईं
विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति यह स्पष्ट करती है कि केवल भव्य भवन बनाने से शिक्षा का स्तर नहीं सुधरता। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी छात्राओं को पानी और बिजली जैसी प्राथमिक सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। छात्राओं ने मांग की है कि प्रबंधन और जनप्रतिनिधि अपनी एसी वाली सुख-सुविधाओं से बाहर निकलकर इस बदहाली का संज्ञान लें। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो यह संस्थान अपनी मूल पहचान खो देगा और शिक्षा के नाम पर केवल एक खोखली इमारत बनकर रह जाएगा।