Jharkhand News: झारखंड के गढ़वा जिले में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं. मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यहां महिलाओं की उम्र 50 वर्ष पूरी होते ही उनका नाम पोर्टल से तत्काल हटा दिया जा रहा है, लेकिन नए पात्र आवेदकों को जोड़ने की प्रक्रिया महीनों से बंद है. लाभ से वंचित सैकड़ों महिलाएं अपना नाम जुड़वाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं, मगर पोर्टल बंद होने का हवाला देकर उन्हें वापस लौटा दिया जा रहा है.
ठंडे बस्ते में पड़े 45 हजार आवेदन
प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि नवंबर 2025 में "सरकार आपके द्वार" शिविरों के दौरान जमा किए गए लगभग 45 हजार आवेदन अब तक धूल फांक रहे हैं. गढ़वा नगर परिषद सहित विभिन्न प्रखंडों से आए इन आवेदनों की न तो डेटा एंट्री की गई है और न ही इन्हें जांच के लिए आगे बढ़ाया गया है. सर्वर और पोर्टल की खराबी के कारण सुधार का काम भी पूरी तरह रुका हुआ है, जिससे पात्र महिलाएं योजना के लाभ से दूर हैं.
18 महीनों से नहीं हुई नई एंट्री
आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले डेढ़ साल से जिले में एक भी नया नाम योजना में नहीं जोड़ा गया है. इसके विपरीत, केवाईसी और तकनीकी कारणों से अब तक करीब 14 हजार महिलाओं के नाम काटे जा चुके हैं. जून 2025 में जहां लाभार्थियों की संख्या 2.27 लाख से अधिक थी, वह मार्च 2026 में घटकर 2.21 लाख के करीब पहुंच गई है. सरकार की ओर से सहायता राशि को 1000 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये तो कर दिया गया, लेकिन नए आवेदकों के लिए पोर्टल का दरवाजा अब भी बंद है.
उम्मीदों के बीच भटकती महिलाएं
महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से शुरू हुई इस योजना का लाभ शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की महिलाओं को मिलना था. 18 से 50 वर्ष की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सीधे राशि भेजने की यह महत्वाकांक्षी योजना गढ़वा में सरकारी उदासीनता की भेंट चढ़ती दिख रही है. एक तरफ उम्र का हवाला देकर लाभ छीना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ युवा पात्र महिलाओं को जोड़ने के प्रति सिस्टम गंभीर नजर नहीं आ रहा है.