National News: महिला आरक्षण से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित न हो पाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8:30 बजे देश को संबोधित करेंगे. 528 सदस्यों वाली सदन में मतदान के दौरान बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जिससे यह दो-तिहाई बहुमत के अभाव में गिर गया. सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री इस संबोधन के जरिए बिल के तकनीकी पहलुओं और इसे पास न होने देने के लिए विपक्षी दलों के रुख पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करेंगे.
विपक्ष के रवैये और महिला सुरक्षा पर होगा फोकस
प्रधानमंत्री अपने संबोधन में महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार द्वारा किए गए प्रयासों और विपक्ष द्वारा इसमें डाली गई बाधाओं पर अपनी बात रख सकते हैं. माना जा रहा है कि मोदी इस विफलता के लिए विपक्षी एकजुटता को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे देश की महिलाओं के साथ विश्वासघात करार देंगे. संबोधन के दौरान विपक्ष की प्रतिगामी सोच और राजनीति के कारण आधी आबादी के अधिकारों में हुई देरी पर पीएम अपनी पीड़ा व्यक्त कर सकते हैं.
सीटों के विस्तार और परिसीमन का था बड़ा लक्ष्य
प्रस्तावित विधेयक के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने की योजना थी, ताकि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को सही ढंग से समायोजित किया जा सके. सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर महिलाओं को उनका संवैधानिक हक देना चाहती थी. हालांकि, विपक्षी दलों ने परिसीमन और उत्तर-दक्षिण राज्यों के प्रतिनिधित्व का हवाला देते हुए इसका विरोध किया, जिसके कारण ऐतिहासिक बदलाव की यह कोशिश फिलहाल अधर में लटक गई है.
सियासी गलियारों में हलचल और आगे की राह
लोकसभा में मिली इस हार के बाद भाजपा और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. आज रात होने वाला प्रधानमंत्री का यह संबोधन आगामी चुनावों के मद्देनजर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सरकार इस मुद्दे को सीधे जनता की अदालत में ले जाने की तैयारी में है. महिला आरक्षण को "चुनावी हथियार" बनाने और विपक्ष की "महिला विरोधी" छवि पेश करने की रणनीति के बीच देश की नजरें अब प्रधानमंत्री के संदेश पर टिकी हैं.