Rahul Gandhi Citizenship Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के अपने ही आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है. कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर जारी स्पष्टीकरण में बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान वकीलों की राय के आधार पर आदेश पारित किया गया था. लेकिन फैसले की समीक्षा करने पर पाया गया कि 2014 के एक पुराने निर्णय के अनुसार, ऐसे मामलों में आरोपी पक्ष को नोटिस देना अनिवार्य है. इसी तकनीकी आधार पर न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने आदेश पर स्टे लगा दिया है.
दोहरी नागरिकता और याचिकाकर्ता के दावे
यह पूरा विवाद राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता से जुड़ा है. कर्नाटक निवासी एस. विग्नेश शिशिर ने याचिका दायर कर दावा किया है कि राहुल गांधी के पास ब्रिटेन की नागरिकता रही है और वे वहां मतदाता के रूप में पंजीकृत थे. याचिकाकर्ता ने साक्ष्य के तौर पर कुछ दस्तावेज भी पेश किए हैं, जिनमें राहुल गांधी की ब्रिटिश चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी का आरोप लगाया गया है. इसी को आधार बनाकर उन पर पासपोर्ट अधिनियम और आधिकारिक गोपनीयता कानून के उल्लंघन का मामला चलाने की मांग की जा रही है.
एमपी-एमएलए कोर्ट से खारिज हो चुकी है अर्जी
इससे पहले, 28 जनवरी 2026 को एमपी-एमएलए कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस मांग को खारिज कर दिया था. निचली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि नागरिकता को लेकर कोई नया या ठोस सबूत सामने नहीं आया है. हाईकोर्ट ने अब गृह मंत्रालय के फॉरेनर्स डिवीजन से जुड़े दस्तावेजों का भी संज्ञान लिया है. कोर्ट का मानना है कि बिना दूसरे पक्ष को सुने कोई भी आदेश देना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगा, इसलिए अब 20 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है.
सीबीआई के पास जाने की तैयारी में याचिकाकर्ता
हाईकोर्ट द्वारा अपने ही आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है. याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने अदालत के इस नए कदम पर असंतोष जताया है और कहा है कि वे एफआईआर के आदेश को वापस लेने के खिलाफ सीबीआई से शिकायत करेंगे. फिलहाल, कानूनी पेच फंसने के कारण राहुल गांधी को बड़ी राहत मिली है, लेकिन 20 अप्रैल की सुनवाई यह तय करेगी कि यह मामला आगे किस दिशा में जाएगा और क्या गृह मंत्रालय के दस्तावेज कोई नई कहानी बयां करेंगे.