National News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करते हुए अपने भाषण की शुरुआत बेहद भावुक शब्दों में की। उन्होंने देश की करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगते हुए कहा, "आज मैं बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर देश की माताएं, बहनों और बेटियों से बात करने के लिए आया हूं। मैं आपकी लड़ाई लड़ने आया था, लेकिन स्वार्थी राजनीति ने इस राह में रोड़े अटका दिए। हमारे भरसक प्रयासों के बाद भी नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित नहीं हो पाया, जिसके लिए मैं हृदय से क्षमाप्रार्थी हूं।" पीएम ने कहा कि उनके लिए हमेशा देशहित सर्वोपरि रहा है, लेकिन विपक्ष ने दलहित को ऊपर रखकर नारी शक्ति के सपनों को कुचल दिया है।
विपक्ष पर भ्रूण हत्या और पाप का आरोप
पीएम मोदी ने कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके जैसी पार्टियों पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इन दलों ने सदन के भीतर महिला अधिकारों की "भ्रूण हत्या" की है। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जब नारी हित का प्रस्ताव गिरा, तब विपक्ष का मेजें थपथपाना और खुशी मनाना देश की हर महिला के आत्मसम्मान पर गहरी चोट थी। प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि नारी अपना अपमान कभी नहीं भूलती और विपक्ष ने जो "पाप" किया है, उसकी सजा उन्हें जनता की अदालत में जरूर मिलेगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने महिला सशक्तिकरण के महायज्ञ में बाधा डालकर खुद को संविधान का गुनहगार साबित कर दिया है।
परिवारवाद और बांटो-राज करो की राजनीति पर प्रहार
प्रधानमंत्री ने कहा कि परिवारवादी पार्टियों को यह डर सता रहा था कि अगर आम घरों की महिलाएं सशक्त हो गईं, तो उनका राजनीतिक वजूद खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने कांग्रेस पर अंग्रेजों की "बांटो और राज करो" की नीति अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि परिसीमन को लेकर फैलाया गया झूठ इसी साजिश का हिस्सा था। पीएम ने स्पष्ट किया कि सरकार 2029 के चुनावों से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए पूरी तरह तैयार थी, जिससे उत्तर से दक्षिण तक हर राज्य की नारी शक्ति को नई उड़ान मिलती, लेकिन विपक्ष ने इसे अंतरराष्ट्रीय दबाव और हार के डर से विफल कर दिया।
कांग्रेस का एंटी-रिफॉर्म चेहरा और भविष्य का संकल्प
संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस को विकास विरोधी करार देते हुए कहा कि उसने हमेशा सुधारों का विरोध किया है, चाहे वह जनधन योजना हो, डिजिटल पेमेंट हो या ट्रिपल तलाक कानून। उन्होंने कांग्रेस के वर्क कल्चर को "लटकाना, अटकाना और भटकाना" बताया। अंत में, प्रधानमंत्री ने देश को भरोसा दिलाया कि भले ही आज संसद में संख्याबल के कारण बाधा आई हो, लेकिन उनकी सरकार महिलाओं को उनका हक दिलाने के संकल्प से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने साफ संकेत दिया कि नारी शक्ति का यह अपमान आने वाले समय में देश का सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनेगा।