Jharkhand News: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के स्पेशल डीजी दीपक कुमार ने शनिवार को पश्चिमी सिंहभूम के बालिबा कैंप में नक्सल अभियान की उच्चस्तरीय समीक्षा की. मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा कि सारंडा में अब गिने-चुने नक्सली ही बचे हैं, जिनका एक महीने के भीतर सफाया कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि शीर्ष नक्सली नेता मिसिर बेसरा और असीम मंडल के पास अब केवल दो ही रास्ते बचे हैं, वे आत्मसमर्पण करें या फिर सुरक्षा बलों की गोली का सामना करने के लिए तैयार रहें. डीजी ने साफ किया कि हजारीबाग में मारे गए नक्सलियों की तरह ही सारंडा के नक्सलियों का भी हश्र होने वाला है.
एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा को पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन तेज
बालिबा और छोटानागरा के जंगलों में चल रहे इस ऑपरेशन का मुख्य टार्गेट एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा है. दो दिन पूर्व चराडेरा में हुई मुठभेड़ के बाद से ही सीआरपीएफ, कोबरा, जगुआर और जिला पुलिस के जवान पूरे दस्ते को घेरे हुए हैं. स्पेशल डीजी ने अभियान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया है कि घेराबंदी इतनी पुख्ता हो कि नक्सलियों को भागने का कोई मौका न मिले. इस दौरान उन्होंने कैंप का निरीक्षण कर जवानों की सुविधाओं का जायजा लिया और उनका हौसला बढ़ाते हुए कहा कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम दौर में है.
हजारीबाग मुठभेड़ के बाद नक्सलियों के मनोबल पर बड़ी चोट
हजारीबाग के केरेडारी स्थित खपिया जंगल में शुक्रवार को सुरक्षा बलों ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए चार नक्सलियों को ढेर किया था. इनमें 15 लाख रुपये का इनामी रीजनल कमेटी सदस्य सहदेव महतो उर्फ सुभाष भी शामिल था, जिस पर अकेले 41 संगीन मामले दर्ज थे. मारे गए चारों नक्सलियों पर कुल 77 आपराधिक मामले दर्ज थे, जो उनके खौफनाक नेटवर्क की तस्दीक करते हैं. शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने सहदेव का शव उसके परिजनों को सौंप दिया. हजारीबाग की इस सफलता ने सारंडा में सक्रिय नक्सलियों के बीच खौफ पैदा कर दिया है और सुरक्षा बलों का मनोबल सातवें आसमान पर है.
आला अधिकारियों की मौजूदगी में बनी सारंडा को “नक्सल मुक्त” करने की रणनीति
स्पेशल डीजी के इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान सीआरपीएफ आईजी साकेत कुमार, एसटीएफ आईजी अनूप बीरथारे और एसपी अमित रेनू समेत कई आला अधिकारी मौजूद रहे. अधिकारियों के बीच हुई इस मैराथन बैठक में सारंडा जंगल के भीतर नक्सलियों के छिपे हुए ठिकानों तक पहुंचने और उनके रसद नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने की रणनीति तैयार की गई. पुलिस अब तकनीकी और जमीनी सूचनाओं के आधार पर मिसिर बेसरा के बेहद करीब पहुंचने का दावा कर रही है. राज्य के इस सबसे कठिन भौगोलिक क्षेत्र में चल रहा यह महाभियान झारखंड को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है.