Jharkhand News: झारखंड के सांसदों को अपने क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए मिलने वाली सांसद निधि को खर्च करने के मामले में बड़ी विसंगति सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार, जहां कुछ सांसदों ने आवंटित राशि का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा जनहित की योजनाओं में लगा दिया है, वहीं कुछ सांसदों का खाता तक नहीं खुल सका है. यह आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य के अलग-अलग संसदीय क्षेत्रों में विकास की रफ्तार एक समान नहीं है और कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं केवल फंड का उपयोग न होने के कारण लंबित हैं.
संजय सेठ और सुखदेव भगत ने विकास कार्यों में दिखाई सबसे अधिक तेजी
रांची के भाजपा सांसद संजय सेठ अपने संसदीय क्षेत्र में विकास निधि खर्च करने के मामले में राज्य में प्रथम स्थान पर हैं. उन्होंने आवंटित फंड का 82.7% हिस्सा जनहित की योजनाओं में उपयोग किया है. वहीं, लोहरदगा के कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत 75.5% फंड उपयोग के साथ दूसरे स्थान पर हैं. गौरतलब है कि सुखदेव भगत को अन्य सांसदों के औसत 9.8 करोड़ रूपए के मुकाबले सर्वाधिक 12.3 करोड़ रूपए का फंड मिला था, जिसका बड़ा हिस्सा उन्होंने धरातल पर उतारा है.
जमशेदपुर, खूंटी और दुमका के सांसदों का प्रदर्शन भी रहा बेहतर
फंड खर्च करने की सूची में जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो (74.1%), खूंटी के कालीचरण मुंडा (72.2%) और दुमका के नलिन सोरेन (71.2%) का प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया है. इन सांसदों ने अपने आवंटित बजट का 70% से अधिक हिस्सा विकास योजनाओं में निवेश किया है. इसके विपरीत, पलामू के सांसद बीडी राम ने 53.9% और गिरिडीह के सीपी चौधरी ने 46.3% राशि खर्च की है, जिसे औसत श्रेणी में रखा गया है.
कोयलांचल और संथाल परगना के कुछ सांसदों की रफ्तार रही धीमी
धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो 41.4% और चाईबासा की जोबा मांझी 28.9% फंड ही खर्च कर पाई हैं. वहीं, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी के क्षेत्र में मात्र 25.8% और राजमहल के सांसद विजय हांसदा के क्षेत्र में 20.5% विकास निधि का उपयोग हुआ है. चतरा के सांसद कालीचरण सिंह भी अब तक केवल 20% फंड का ही उपयोग सुनिश्चित कर पाए हैं. इन क्षेत्रों में फंड खर्च होने की धीमी गति के कारण कई स्थानीय विकास योजनाएं अभी भी लंबित हैं.
निशिकांत दुबे और मनीष जायसवाल के खर्च आंकड़े सबसे कम
रिपोर्ट के अनुसार, गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे अब तक अपनी निधि का मात्र 1.8% हिस्सा ही उपयोग कर सके हैं. वहीं, हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल की स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहां फंड यूटिलाइजेशन 0.0% दर्ज किया गया है. विकास निधि खर्च करने में बरती गई यह सुस्ती दर्शाती है कि इन क्षेत्रों में सांसद निधि से होने वाले बुनियादी ढांचे के कार्यों में अभी शुरुआत होना बाकी है.