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  • 2026-04-20

Jamshedpur Big News: बहरागोड़ा में दूसरे विश्वयुद्ध का तीसरा बम कल डिफ्यूज करेगी सेना, जानें क्या है पूरी मिस्ट्री, देखें VIDEO

Jamshedpur Big News: बहरागोड़ा के सुवर्णरेखा नदी तट पर मिला तीसरा शक्तिशाली बम कल यानी मंगलवार को भारतीय सेना के बम निरोधक दस्ते द्वारा नष्ट किया जाएगा। इलाके में बार-बार मिल रहे इन सक्रिय बमों ने ग्रामीणों के बीच अचरज और भय पैदा कर दिया है। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करते हुए पूरे प्रभावित क्षेत्र को खाली करा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बम भी उतना ही विनाशकारी हो सकता है जितने पिछले दो बम थे। संभवतः नदी में बालू खनन के कारण यह विस्फोटक रेत की सतह पर दिखाई देने लगा था, जिसके बाद स्थानीय पुलिस ने तत्काल सेना को इसकी सूचना दी।
मार्च से जारी है सक्रिय बम मिलने का सिलसिला
बहरागोड़ा में बम मिलने की यह तीसरी बड़ी घटना है। इससे पहले मार्च 2026 के मध्य में बालू खनन के दौरान ग्रामीणों को एक विशाल सिलेंडर जैसा ढांचा मिला था, जिसकी जांच करने पर वह लगभग 227 किलो वजनी अमेरिकी निर्मित सक्रिय बम निकला था। इसके कुछ ही दिनों बाद एक ग्रामीण के घर के समीप से दूसरा सक्रिय बम बरामद हुआ था। भारतीय सेना की बम डिस्पोजल यूनिट ने 25 मार्च को एक विशेष ऑपरेशन चलाकर इन दोनों बमों को नियंत्रित विस्फोट के जरिए सुरक्षित रूप से नष्ट किया था। तब प्रशासन को लगा था कि खतरा टल गया है, लेकिन तीसरे बम के मिलने ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता फिर बढ़ा दी है।

चाकुलिया हवाई अड्डे का ऐतिहासिक कनेक्शन
बहरागोड़ा के इस इलाके में भारी मात्रा में विस्फोटक मिलने के पीछे दूसरे विश्वयुद्ध (1942-1945) का गहरा इतिहास छिपा है। उस दौर में पास ही स्थित चाकुलिया हवाई अड्डा ब्रिटिश और अमेरिकी वायुसेना का एक प्रमुख रणनीतिक केंद्र हुआ करता था। यहां से B-29 सुपरफोर्ट्रेस जैसे दिग्गज अमेरिकी बमवर्षक विमान बर्मा और अन्य दक्षिण-पूर्वी देशों में जापानी सेना के ठिकानों पर हमला करने के लिए उड़ान भरते थे। रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये बम उसी समय के हैं, जो या तो लोड करते समय गलती से गिर गए या फिर नदी के रास्ते परिवहन के दौरान पानी में समा गए थे और अब दशकों बाद सतह पर आ रहे हैं।

सक्रिय बारूद बना हुआ है बड़ी चुनौती
हैरानी की बात यह है कि करीब 80 वर्षों तक पानी और कीचड़ में दबे रहने के बाद भी इन बमों के अंदर मौजूद बारूद और फ्यूज मैकेनिज्म पूरी तरह सक्रिय पाया गया है। जानकारों के अनुसार, दूसरे विश्वयुद्ध के समय के ये AN-M64 मॉडल के बम आज भी उतने ही खतरनाक हैं जितने युद्ध के समय थे। सेना की टीम ने ग्रामीणों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी संदिग्ध वस्तु को हाथ न लगाएं। मंगलवार को होने वाली कार्रवाई के दौरान आसपास के गांवों में हाई अलर्ट रहेगा और सेना की निगरानी में इस तीसरे बम को भी सुरक्षित रूप से डिफ्यूज कर दिया जाएगा।


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