Jharkhand Big News: झारखंड में पहली बार अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के अधीन एक विशेष एक्सट्रैडिशन सेल (प्रत्यर्पण प्रकोष्ठ) का गठन किया गया है. एडीजी मनोज कौशिक के नेतृत्व में बना यह सेल उन कुख्यात अपराधियों पर लगाम कसेगा जो दुबई, मलेशिया और सिंगापुर जैसे देशों में बैठकर झारखंड में हत्या, रंगदारी और संगठित अपराध का नेटवर्क चला रहे हैं. यह सेल विशेष रूप से प्रिंस खान जैसे उन भगोड़ों को वापस लाने की कानूनी बाधाओं को दूर करेगा, जो विदेश से गिरोह संचालित कर रहे हैं.
इंटरपोल और विदेश मंत्रालय के साथ होगा समन्वय
इस विशेष सेल की कमान एक डीएसपी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है, जिनके साथ पांच इंस्पेक्टर और दो कानूनी विशेषज्ञ काम करेंगे. ये कानूनी अधिकारी अंतरराष्ट्रीय कानूनों, प्रत्यर्पण संधियों और कूटनीतिक प्रक्रियाओं के विशेषज्ञ होंगे. यह टीम सीधे तौर पर सीबीआई, विदेश मंत्रालय और इंटरपोल के संपर्क में रहेगी, ताकि जैसे ही किसी कुख्यात का लोकेशन मिले, तत्काल रेड या ब्लू कॉर्नर नोटिस के माध्यम से उसकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की जा सके.
कुख्यात अपराधियों का बनेगा हाई-टेक डेटा बैंक
सीआईडी का यह नया सेल विदेश में बैठे अपराधियों का एक विस्तृत डेटा बैंक तैयार करेगा. इसमें उनकी डिजिटल ट्रैकिंग के साथ-साथ उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स, आईपी एड्रेस और झारखंड में सक्रिय उनके मददगारों की कुंडली खंगाली जाएगी. इस डेटा बैंक के जरिए पुलिस अपराधियों के वित्तीय स्रोतों और उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने की योजना बना रही है. हाल ही में अजरबैजान से मयंक सिंह के प्रत्यर्पण की सफलता के बाद अब उसके गुर्गों की पहचान कर उन्हें वापस लाने की तैयारी है.
संगठित और साइबर अपराध पर कड़ा प्रहार
एक्सट्रैडिशन सेल के गठन से न केवल संगठित अपराध बल्कि साइबर अपराधियों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को तोड़ने में भी मदद मिलेगी. एडीजी मनोज कौशिक के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समन्वय और मजबूत साक्ष्य जुटाने से प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आएगी. अब विदेश में बैठकर सुरक्षित महसूस करने वाले कुख्यात अपराधियों को झारखंड पुलिस कानूनी शिकंजे में लेकर सीधे भारत लाएगी, जिससे राज्य की कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलेगी.