Jharkhand News: झारखंड के गोड्डा जिले के शिवाजी नगर से सामने आई यह कहानी सिर्फ एक परीक्षा परिणाम की नहीं, बल्कि जज्बे और हौसले की है. जन्म से 100 प्रतिशत दिव्यांग (सेरेब्रल पाल्सी) मो. फैजानुल्लाह ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 93.80 प्रतिशत अंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी बाधा टिक नहीं सकती.
जब हाथ साथ नहीं देते, तब हिम्मत रास्ता बनाती है
फैजानुल्लाह हाथों से लिख पाने में असमर्थ हैं, लेकिन उन्होंने इसे कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. उन्होंने मुंह से लिखना सीखा और उसी के सहारे अपनी पढ़ाई जारी रखी. जहां आम हालात में छोटी मुश्किलें भी लोगों को रोक देती हैं, वहीं फैजान हर दिन अपनी सीमाओं से लड़ते रहे. परीक्षा में भी उन्होंने इसी तरीके से लिखकर यह साबित कर दिया कि असली ताकत शरीर में नहीं, बल्कि इरादों में होती है.
मुश्किलों के बीच भी पढ़ाई नहीं रुकी
फैजान की पढ़ाई होम-बेस्ड एजुकेशन के तहत हुई, जिसमें शिक्षक नियमित रूप से उनके घर जाकर पढ़ाते थे. सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी पढ़ाई कभी बाधित नहीं हुई. उन्होंने हर परिस्थिति में निरंतरता बनाए रखी और यही उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी. उन्होंने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया कि उनके पास क्या कमी है, बल्कि इस पर ध्यान केंद्रित किया कि जो उपलब्ध है, उससे बेहतर कैसे किया जा सकता है.
मेहनत के नंबर खुद कहानी कहते हैं
फैजान ने कुल 500 में से 469 अंक हासिल किए, जो 93.80 प्रतिशत के बराबर है. उर्दू में 96, हिंदी में 90, गणित में 98, विज्ञान में 93, सामाजिक विज्ञान में 92 और अंग्रेजी में 84 अंक लाकर उन्होंने सभी विषयों में A+ ग्रेड प्राप्त किया. ये अंक सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उनके संघर्ष, धैर्य और निरंतर मेहनत की कहानी बयान करते हैं.
परिवार और शिक्षकों का साथ बना ताकत
फैजान की इस सफलता के पीछे उनके परिवार और शिक्षकों की अहम भूमिका रही. उनके पिता मो. अनवर आलम और माता नजिमा ने हर परिस्थिति में उनका मनोबल बनाए रखा और उन्हें कभी कमजोर महसूस नहीं होने दिया. वहीं संसाधन केंद्र के शिक्षक जितेंद्र कुमार भगत नियमित रूप से उनके घर जाकर पढ़ाते रहे. शिक्षा विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए लैपटॉप ने भी उनकी पढ़ाई को नई दिशा देने में मदद की.
एक छात्र नहीं, एक प्रेरणा बन चुके हैं फैजान
आज फैजानुल्लाह की सफलता से पूरे गोड्डा जिले में खुशी और गर्व का माहौल है. उनकी कहानी सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो किसी भी तरह की चुनौती से जूझ रहा है. यह कहानी बताती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर हिम्मत और मेहनत साथ हो तो हर मंजिल हासिल की जा सकती है.
फैजानुल्लाह ने यह साबित कर दिया कि सीमाएं शरीर में नहीं, सोच में होती हैं. अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मुश्किल रास्ता नहीं रोक सकती. उनकी यह सफलता आने वाले समय के लिए उम्मीद और प्रेरणा की एक मजबूत मिसाल है.