BREAKING: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान (29 अप्रैल) से ठीक पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) घोटाले में अपनी कार्रवाई तेज कर दी है. शनिवार सुबह ED की टीमों ने एक साथ कोलकाता, बर्धवान और उत्तर 24 परगना के हाबरा में 9 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की. यह कार्रवाई उन सप्लायर्स और एक्सपोर्टर्स के खिलाफ की गई है, जिन पर गरीबों के हक का अनाज विदेशों में तस्करी करने और खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचने का आरोप है. राज्य में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को संपन्न हो चुका है, ऐसे में इस रेड ने राजनीतिक गलियारों में भारी तहलका मचा दिया है.
2020 की एफआईआर और गेहूं की हेरफेर का खेल
यह पूरा मामला साल 2020 में बशीरहाट पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है. जांच में खुलासा हुआ है कि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवंटित गेहूं को बिचौलियों और सप्लायर्स की मिलीभगत से बेहद कम कीमतों पर खरीदा गया और फिर उसे अवैध रूप से डंप कर दिया गया. घोटालेबाजों ने पहचान छिपाने के लिए एफसीआई (FCI) और राज्य सरकार के मार्का वाली बोरियों को बदलकर या पलटकर उनकी री-पैकेजिंग की. इसके बाद इस अनाज को वैध स्टॉक बताकर या तो खुले बाजार में बेचा गया या फिर विदेश निर्यात कर दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगा.
जांच की आंच में कई सफेदपोश चेहरे
ED की इस ताजा छापेमारी का मुख्य उद्देश्य उस मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन) का पता लगाना है, जिसके जरिए घोटाले की काली कमाई को सफेद किया गया. जानकारों का मानना है कि इन 9 ठिकानों से मिले डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नामों पर शिकंजा कस सकता है, जो बंगाल चुनाव के नतीजों को भी प्रभावित कर सकता है.