Jharkhand News: झारखंड के राज्यपाल सचिवालय और उनके आवासीय कार्यालय (लोकभवन) के स्वरूप को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप ढालने की कवायद शुरू हो गई है. राज्य के गठन के समय (वर्ष 2001) जो प्रशासनिक ढांचा तैयार किया गया था, वह आज के बढ़ते कार्यबोझ के सामने छोटा पड़ रहा है. इसी को देखते हुए लोकभवन ने पदों के पुनर्गठन का एक विस्तृत प्रस्ताव मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग को भेजा है. इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य उन पदों को समाप्त करना है जिनकी उपयोगिता खत्म हो चुकी है और उनकी जगह नए एवं तकनीकी रूप से प्रासंगिक पदों का सृजन करना है.
विश्वविद्यालयों और विधेयकों के बढ़ते दबाव ने बढ़ाई जरूरत
प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि पिछले दो दशकों में लोकभवन की कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव आया है. वर्ष 2001 में जहां प्रति वर्ष औसतन 5-6 विधेयक ही राजभवन पहुंचते थे, अब उनकी संख्या कई गुना बढ़ गई है. इसी तरह, राज्य में विश्वविद्यालयों की संख्या 6 से बढ़कर कहीं अधिक हो चुकी है, जिससे कुलाधिपति के रूप में राज्यपाल के पास शैक्षणिक कार्यों का दबाव बढ़ा है. जनशिकायत, विवेकाधीन अनुदान, दुमका कार्यालय और मदरा मुंडा राजकीय अतिथिशाला के सुचारू संचालन के लिए भी अतिरिक्त मानव बल की आवश्यकता महसूस की जा रही है.
193 कर्मियों की टीम संभालेगी कमान, 74 लाख का आएगा अतिरिक्त बोझ
वर्तमान में लोकभवन में स्वीकृत पदों की कुल संख्या 153 है. नई योजना के तहत इनमें से 82 पुराने पदों को प्रत्यर्पित (समाप्त) कर दिया जाएगा और उनकी जगह 122 नए पद सृजित होंगे. इस प्रकार, कुल कर्मियों की संख्या 193 हो जाएगी. पदों में इस 40 की शुद्ध बढ़ोतरी से राज्य के खजाने पर प्रति वर्ष लगभग 74.19 लाख रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ आएगा. वर्तमान में वेतन मद में होने वाला वार्षिक खर्च 2.55 करोड़ रुपये से बढ़कर 3.29 करोड़ रुपये हो जाएगा.
कैबिनेट की मुहर का इंतजार
लोकभवन की प्रशासनिक मजबूती से जुड़ा यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव मंगलवार को होने वाली कैबिनेट की अगली बैठक में चर्चा के लिए रखा जाएगा. यदि कैबिनेट इसे हरी झंडी दे देती है, तो राज्यपाल सचिवालय अधिक व्यवस्थित और त्वरित गति से कार्य करने में सक्षम होगा. इसे केवल पदों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि बदलते वक्त के साथ संवैधानिक संस्था को प्रशासनिक रूप से सशक्त बनाने के कदम के रूप में देखा जाना चाहिए.