Social Media Trend: आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने वाले राघव चड्ढा के इस फैसले ने दिल्ली की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है, लेकिन इसके साथ ही उनकी मुश्किलें भी बढ़ती नजर आ रही हैं। उन्होंने न केवल खुद पार्टी बदली, बल्कि अपने साथ AAP के छह राज्यसभा सांसदों को भी बीजेपी में शामिल करा दिया, जिससे अरविंद केजरीवाल की पार्टी के लिए अपने संगठन को संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया है। हालांकि, यह राजनीतिक कदम खासकर युवाओं और "जेन-जी" वर्ग को पसंद नहीं आ रहा है, और इसका असर उनकी लोकप्रियता पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है।
सोशल मीडिया पर नाराजगी, लाखों फॉलोअर्स ने किया अनफॉलो
डिजिटल दौर में सोशल मीडिया किसी भी नेता की लोकप्रियता का बड़ा पैमाना बन चुका है, और यहां भी राघव चड्ढा को बड़ा झटका लगा है। आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी में शामिल होने के महज 24 घंटे के भीतर उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से करीब 10 लाख फॉलोअर्स कम हो गए। जहां शुक्रवार तक उनके करीब 14.6 मिलियन फॉलोअर्स थे, वहीं शनिवार दोपहर तक यह संख्या घटकर लगभग 13.5 मिलियन रह गई। इस पर अनीश गवांडे ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अनफॉलो अभियान के कारण यह गिरावट आई है, और इंटरनेट की दुनिया में लोकप्रियता जितनी तेजी से मिलती है, उतनी ही जल्दी खत्म भी हो सकती है।
युवाओं के बीच खास पहचान, जमीनी मुद्दों से बनाई थी छवि
राघव चड्ढा ने अपने राजनीतिक सफर के दौरान युवाओं के बीच एक अलग पहचान बनाई थी, क्योंकि वे संसद में ऐसे मुद्दे उठाते रहे जो आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े होते हैं और अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। इनमें एयरपोर्ट पर महंगे समोसे, पितृत्व अवकाश (पेटरनिटी लीव), शहरों की ट्रैफिक समस्या, टेलीकॉम कंपनियों की डेटा लिमिट और डिलीवरी पार्टनर्स यानी गिग वर्कर्स के शोषण जैसे विषय शामिल रहे। इतना ही नहीं, उन्होंने खुद एक दिन के लिए Blinkit के डिलीवरी पार्टनर के रूप में काम करके उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश भी की थी। उनके इन प्रयासों का असर यह रहा कि सरकार ने "10 मिनट डिलीवरी" जैसी बाध्यकारी समय सीमा को हटाने का निर्देश दिया, जिससे उनकी छवि एक जमीनी और संवेदनशील नेता के रूप में बनी।
अपनी पार्टी बनाने की चर्चा, लेकिन चुना बीजेपी का रास्ता
जब उन्हें राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटाया गया था, तब उनके समर्थन में काफी आवाजें उठी थीं और सोशल मीडिया पर उन्हें अपनी अलग "जेन-जी पार्टी" बनाने की सलाह भी दी गई थी। उन्होंने खुद एक इंस्टाग्राम रील में इस सुझाव को “दिलचस्प विचार” बताया था, जिससे यह कयास लगाए जा रहे थे कि वह नई राजनीतिक राह चुन सकते हैं, लेकिन आखिर में उन्होंने बीजेपी में शामिल होने का फैसला लिया, जिसने उनके समर्थकों को चौंका दिया।
#UnfollowRaghavChadha ट्रेंड, पुराने पोस्ट भी हटाए
राघव चड्ढा के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर #UnfollowRaghavChadha ट्रेंड करने लगा है और कई प्रभावशाली लोगों ने भी उन्हें अनफॉलो कर दिया है। इस बीच लोगों का ध्यान इस बात पर भी गया कि उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से प्रधानमंत्री और बीजेपी की आलोचना वाले पुराने पोस्ट हटा दिए हैं। इस पर AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने तंज कसते हुए कहा कि अब उनके प्रोफाइल पर मोदी नाम से जुड़े केवल दो पोस्ट बचे हैं और दोनों ही प्रधानमंत्री की तारीफ में हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि उनका यह राजनीतिक कदम जहां एक ओर नई दिशा की ओर इशारा करता है, वहीं दूसरी ओर उनकी लोकप्रियता को भी बड़ा झटका लगा है।