Jharkhand News: झारखंड हाई कोर्ट ने धनबाद स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च (CSIR) के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के आवास किराए में हुई अप्रत्याशित बढ़ोतरी पर कड़ी नाराजगी जताई है. जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने संस्थान के निदेशक से पूछा कि मात्र छह महीने के भीतर हाउस रेंट 1 लाख रुपये से बढ़कर 16 लाख रुपये कैसे हो गया. अदालत ने निदेशक को निर्देश दिया है कि प्रार्थी गोपाल चंद्र लोहार के रेंट बिल का नए सिरे से पुनर्मूल्यांकन किया जाए.
रिटायरमेंट फंड में कटौती का आरोप
प्रार्थी गोपाल चंद्र लोहार दिसंबर 2021 में टेक्नीशियन पद से सेवानिवृत्त हुए थे. उनका आरोप है कि संस्थान ने उनकी ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट मद के 23 लाख रुपये में से 16 लाख रुपये काटने की मंशा से यह बिल बढ़ाया है. अप्रैल 2023 तक बकाया राशि केवल 1.06 लाख रुपये थी, लेकिन नवंबर 2023 में आवास खाली करने के बाद इसे अचानक बढ़ाकर 16.11 लाख रुपये कर दिया गया.
गणना प्रक्रिया पर हाई कोर्ट के सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने रेंट कैलकुलेशन के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए. हाई कोर्ट ने नोट किया कि पहली गणना एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने की थी, जबकि बाद की बढ़ी हुई राशि की गणना एक कनिष्ठ सेक्शन अफसर द्वारा की गई. अदालत ने इसे प्रथम दृष्टया अनुचित मानते हुए कहा कि इतनी कम अवधि में इतनी बड़ी राशि का अंतर समझ से परे है. ट्रिब्यूनल द्वारा बिना विस्तृत जांच के याचिका खारिज करने पर भी हाई कोर्ट ने सवाल उठाए हैं.
अगली सुनवाई 1 मई को
अदालत के आदेश पर CSIR के निदेशक और अन्य अधिकारी व्यक्तिगत रूप से पेश हुए. मामले की अगली सुनवाई 1 मई 2026 को तय की गई है. कोर्ट ने अगली तारीख के लिए निदेशक को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी है, लेकिन संबंधित सेक्शन अफसर और प्रशासनिक अधिकारी को हाजिर रहने का निर्देश दिया है. यह मामला सेवानिवृत्त कर्मियों के अधिकारों और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गया है.