Bokaro News : चर्चित स्केलेटन केस में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने डीएनए जांच के लिए सैंपल जुटाने को लेकर हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए समय सीमा बढ़ाने पर सहमति जताई है।मामला उस युवती से जुड़ा है, जिसके कंकाल मिलने के बाद पूरे राज्य में सनसनी फैल गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान डीएनए जांच को लेकर उठे सवालों और पहचान की पुष्टि के मद्देनजर अदालत लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है।
DNA जांच पर फोकस, सैंपल कलेक्शन के लिए बढ़ी समयसीमा
हाईकोर्ट के आदेश के तहत बरामद कंकाल और परिजनों के डीएनए नमूनों की जांच केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) कोलकाता में कराई जानी है। अब सैंपल संग्रह और प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है, ताकि जांच पूरी पारदर्शिता और वैज्ञानिक तरीके से हो सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत पहले ही जांच प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दे चुकी है। साथ ही पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच को लेकर भी सख्त निगरानी रखी जा रही है।
जांच एजेंसियों पर नजर, वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही पर भी सवाल
इस मामले में जांच की सुस्ती और लापरवाही को लेकर अदालत ने पहले भी कड़ी टिप्पणी की थी। कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो चुकी है, वहीं वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठे हैं। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जांच में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मामले पर टिकी नजरें, DNA रिपोर्ट से खुल सकते हैं कई राज
अब पूरे मामले में डीएनए जांच रिपोर्ट को बेहद अहम माना जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद कंकाल की पहचान और केस की दिशा को लेकर बड़ा खुलासा हो सकता है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद हाईकोर्ट की निगरानी में जांच आगे बढ़ेगी।