Jharkhand News: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) एक बार फिर अपनी अव्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में है. 18 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद रविवार को आयोजित झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) कुप्रबंधन का शिकार हो गई. बोकारो के एक केंद्र पर प्रश्नपत्रों की कमी के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी, जिसने आयोग के उन दावों की पोल खोल दी जिनमें सुरक्षा और पुख्ता इंतजामों की बात कही गई थी.
शुरुआती दौर से ही भ्रष्टाचार और जेल की हवा
जेपीएससी का इतिहास स्थापना के साथ ही दागदार रहा है. प्रथम और द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा में "पिक एंड चूज" की नीति और भारी धांधली के आरोप लगे. भ्रष्टाचार का आलम यह था कि आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप प्रसाद सहित कई सदस्यों को जेल जाना पड़ा. मामला सीबीआई तक पहुंचा और दर्जनों अधिकारियों की नियुक्तियां रद्द करने की नौबत आ गई, जिससे मेधावी छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया.
परीक्षाओं के अंतहीन विवाद और अदालती चक्कर
तीसरी से लेकर ग्यारहवीं जेपीएससी तक, शायद ही कोई ऐसी परीक्षा रही जो निर्विवाद संपन्न हुई हो. छठी जेपीएससी में मेरिट लिस्ट को लेकर हुआ विवाद सालों तक हाईकोर्ट में खिंचता रहा. वहीं, सातवीं से दसवीं परीक्षा के दौरान एक ही कमरे से दर्जनों अभ्यर्थियों के क्रमवार पास होने और ओएमआर शीट गायब होने के बावजूद रिजल्ट जारी करने जैसे अजूबे सामने आए, जिसने आयोग की विश्वसनीयता को पूरी तरह खत्म कर दिया है.
पेपर लीक और छात्रों का टूटता भरोसा
हाल के वर्षों में 11वीं जेपीएससी के दौरान जामताड़ा और चतरा में पेपर लीक के गंभीर आरोपों ने राज्य भर में छात्रों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया. जिस संस्थान पर राज्य के भविष्य के प्रशासनिक अधिकारी चुनने की जिम्मेदारी है, वह अब महज भ्रष्टाचार और अदालती मुकदमों की प्रयोगशाला बनकर रह गई है. बार-बार होती इन गड़बड़ियों ने झारखंड के युवाओं के मनोबल को गहरी चोट पहुंचाई है.