Adityapur: आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में इस बार गर्मी ने समय से पहले ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। अप्रैल महीने में ही तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे पूरे इलाके में लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। सुबह 8 बजे से ही सूरज की तपिश इतनी तेज हो जाती है कि सड़कें तक तपने लगती हैं और दिन चढ़ते-चढ़ते हालात और भी विकराल हो जाते हैं। इस भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर बच्चों और शारीरिक श्रम करने वाले मजदूरों पर पड़ रहा है, जिनके लिए यह मौसम अब सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए खतरा बनता जा रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों के सामने लू लगने और शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा तेजी से बढ़ गया है।
डॉक्टरों की चेतावनी, बच्चों की देखभाल पर दें विशेष ध्यान
स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय डॉक्टरों ने इस बढ़ती गर्मी को लेकर अलर्ट जारी किया है और अभिभावकों को बच्चों की सेहत के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों की पानी की बोतलों में सिर्फ सादा पानी देने के बजाय ओआरएस, नमक-चीनी का घोल या ग्लूकोज मिलाकर देना चाहिए, ताकि शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बना रहे। इसके अलावा बच्चों को हल्के और सूती कपड़े पहनाने, बाहर निकलते समय सिर को टोपी या गमछे से ढकने की भी सलाह दी गई है। खाने में भी बदलाव करने को कहा गया है, जिसमें भारी भोजन से बचते हुए तरबूज, खीरा, दही और छाछ जैसे रसीले और ठंडक देने वाले खाद्य पदार्थ शामिल करने की बात कही गई है। खास तौर पर दोपहर 12 से 3 बजे के बीच बच्चों को घर से बाहर न निकलने की सख्त हिदायत दी गई है।
मजदूरों के लिए भी बढ़ा खतरा, लापरवाही पड़ सकती है भारी
भीषण गर्मी का असर फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों पर भी साफ देखा जा रहा है। डॉक्टरों ने उन्हें हर आधे घंटे में पानी पीने, सिर को ढककर काम करने और ज्यादा देर तक धूप में रहने से बचने की सलाह दी है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि किसी व्यक्ति को तेज सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी जैसा महसूस होना या अत्यधिक थकान होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये हीट स्ट्रोक या डिहाइड्रेशन के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, ताकि समय रहते इलाज मिल सके।
कंक्रीट का शहर बना "तंदूर", लोगों में बढ़ा आक्रोश
आदित्यपुर पहले से ही कंक्रीट के जंगल के रूप में विकसित हो चुका है, जहां फैक्ट्रियों से निकलने वाली गर्मी, वाहनों का धुआं और लगातार हो रही पेड़ों की कटाई ने वातावरण को और भी गर्म बना दिया है। ऐसे में 41 डिग्री का तापमान लोगों के लिए किसी तंदूर से कम नहीं लग रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस हालात में बच्चों को स्कूल भेजना उनकी सेहत के साथ जोखिम लेने जैसा है। लोगों ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर साल सिर्फ एडवाइजरी जारी कर दी जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
लोगों ने उठाए सवाल, प्रशासन से की ठोस कदम की मांग
नगरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूलों का समय सुबह 6 बजे से किया जाए, ताकि बच्चों को भीषण गर्मी से बचाया जा सके। इसके अलावा दोपहर के समय मनरेगा और फैक्ट्रियों में काम बंद करने, शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर प्याऊ और पानी के टैंकर लगाने की भी मांग उठाई गई है। लोगों का कहना है कि गरीबों और मजदूरों के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी एयर कंडीशनर में बैठकर स्थिति का आंकलन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि जब तक कोई बड़ी घटना नहीं होती, तब तक सिस्टम सक्रिय नहीं होता, और अब यह लापरवाही लोगों की जान पर बनती जा रही है।