Jharkhand News: झारखंड में जमीन और राजस्व से जुड़े विवादों को जल्दी सुलझाने के लिए शुरू किया गया ई-रेवेन्यू कोर्ट अब रंग लाने लगा है. मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल इस डिजिटल पहल के नतीजे काफी सकारात्मक दिख रहे हैं. ताजा आंकड़ों की मानें तो राज्य भर में दर्ज कुल मामलों में से करीब 79.52% का निपटारा किया जा चुका है, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिली है.
सिमडेगा और छोटे जिलों का शानदार प्रदर्शन
मामलों को सुलझाने की दौड़ में छोटे जिलों ने बड़े जिलों को काफी पीछे छोड़ दिया है. सिमडेगा जिला 97.47% निपटारा दर के साथ पूरे झारखंड में टॉप पर है. इसके बाद पाकुड़, कोडरमा और लातेहार का नंबर आता है, जहां 94% से ज्यादा मामले हल कर लिए गए हैं. हालांकि, जामताड़ा जैसे कुछ जिलों के लिए चुनौतियां अब भी बरकरार हैं, जहां लगभग 48.33% मामले अब भी फाइलों में दबे हैं.
राजधानी रांची पर मुकदमों का सबसे भारी बोझ
राजधानी होने के नाते रांची में सबसे ज्यादा 83,485 मामले दर्ज किए गए थे. काम के भारी दबाव के बावजूद प्रशासन ने यहां 76.54% मामलों को सुलझाने में कामयाबी हासिल की है. रांची में अभी भी 23.46% पेंडेंसी है, जिसे खत्म करने की कोशिशें जारी हैं. वहीं, धनबाद, हजारीबाग और देवघर जैसे शहरों में भी राजस्व अदालतें मामलों को निपटाने में तेजी दिखा रही हैं.
डिजिटल सिस्टम से आई पारदर्शिता और रफ्तार
सरकार की सर्टिफिकेट केस रिपोर्ट के अनुसार, राज्य भर में कुल 2,73,974 मामले आए थे, जिनमें से 2,17,871 का समाधान हो चुका है. फिलहाल 56,103 मामले पेंडिंग हैं. पलामू जैसे जिलों ने भी 91% से ज्यादा का स्कोर कर बेहतरीन काम किया है. साफ है कि ऑनलाइन सिस्टम आने से न सिर्फ काम में पारदर्शिता आई है, बल्कि लोगों को कचहरी के चक्कर काटने से भी मुक्ति मिल रही है.