Jharkhand News: झारखंड की जेलों में इन दिनों कैदियों का बोझ उनकी क्षमता से कहीं ज्यादा हो गया है. मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य की कुल 32 जेलों में 17,681 कैदियों को रखने की जगह है, लेकिन हकीकत यह है कि वहां वर्तमान में 18,862 कैदी बंद हैं. आंकड़ों पर गौर करें तो पुरुष कैदियों की संख्या निर्धारित क्षमता से काफी अधिक है, जिसके कारण जेल प्रशासन को व्यवस्थाएं संभालने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
सेंट्रल और डिस्ट्रिक्ट जेलों के हालात चिंताजनक
राज्य के सात सेंट्रल जेलों में 10,137 लोगों की जगह है, मगर वहां 10,695 कैदी रखे गए हैं. डिस्ट्रिक्ट जेलों की स्थिति तो और भी गंभीर है; वहां 4,976 की क्षमता के मुकाबले 6,636 कैदी बंद हैं. राहत की बात केवल उपकाराओं (सब-जेल) में है, जहां क्षमता से कम कैदी मौजूद हैं. दिलचस्प तथ्य यह भी है कि कुल कैदियों में से सिर्फ 4,735 ही सजायाफ्ता हैं, जबकि एक बड़ी आबादी उन कैदियों की है जिनका अभी ट्रायल चल रहा है.
महिला कैदियों के लिए अलग जेल की तैयारी
महिला कैदियों की स्थिति और उनकी जरूरतों को देखते हुए राज्य सरकार अब अलग महिला जेल बनाने की योजना पर काम कर रही है. हाई कोर्ट के कड़े रुख और चिंता जताने के बाद सरकार ने सभी जिलों से महिला बंदियों की संख्या और उपलब्ध सुविधाओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. इस पहल का मकसद महिला कैदियों को बेहतर माहौल और जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जो वर्तमान में भीड़भाड़ वाली जेलों में संभव नहीं हो पा रहा.
सुरक्षा और सुविधाओं पर उठ रहे सवाल
जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होने का सीधा असर वहां की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अनुशासन पर पड़ता है. सीमित संसाधनों में ज्यादा लोगों को रखने से अक्सर विवाद और अव्यवस्था की स्थिति पैदा होती है. सरकार की नई पहल और जेलों के विस्तार की योजना से उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में झारखंड की जेलों में कैदियों के मानवाधिकारों और सुरक्षा के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सकेगा.