Jharkhand News: केंद्र सरकार अब देश के बड़े शहरों के विकास के लिए पुरानी परिपाटी छोड़कर डेटा-आधारित नीति अपनाने जा रही है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने 10 लाख से अधिक आबादी वाले 47 शहरों के लिए विशेष नगर-स्तरीय सांख्यिकी रिपोर्ट तैयार करने का फैसला किया है. झारखंड के लिए अच्छी खबर यह है कि इस सूची में रांची और धनबाद का चयन हुआ है. इसका सीधा मकसद इन शहरों में आर्थिक विकास, नए प्रयोग और रोजगार के अवसरों को वैज्ञानिक तरीके से बढ़ाना है.
आखिर क्यों पड़ी इस नई पहल की जरूरत?
अब तक जो भी आर्थिक आंकड़े आते थे, वे देश या राज्य स्तर के होते थे, जिससे किसी खास शहर की असली जरूरतों का पता नहीं चल पाता था. केंद्र का मानना है कि शहर अब आर्थिक तरक्की के असली इंजन बन चुके हैं, लेकिन वहां रोजगार और व्यापार की सटीक जानकारी की कमी है. इसी कमी को दूर करने के लिए रांची और धनबाद को एक स्वतंत्र इकाई मानकर उनका डेटा अलग से जुटाया जाएगा. खास बात यह है कि इस योजना में आम जनता भी 15 मई तक अपने सुझाव दे सकती है.
दो अलग भागों में तैयार होगी रिपोर्ट
इस योजना के तहत रिपोर्ट का पहला हिस्सा रोजगार प्रोफाइल पर आधारित होगा, जिसमें 15 साल से ऊपर के लोगों के कामकाज का विश्लेषण किया जाएगा. इसमें बेरोजगारी दर और उद्योगों में नौकरियों के वितरण जैसे 6 प्रमुख संकेतकों को परखा जाएगा. वहीं रिपोर्ट का दूसरा हिस्सा असंगठित क्षेत्र जैसे रेहड़ी-पटरी व्यवसाय और छोटे घरेलू उद्योगों पर केंद्रित होगा. इसमें महिला उद्यमियों की हिस्सेदारी और व्यापार में इंटरनेट के इस्तेमाल जैसे 13 अहम बिंदुओं के आधार पर आर्थिक स्थिति को समझने की कोशिश की जाएगी.
पड़ोसी राज्यों के मुकाबले झारखंड की स्थिति
देश के चयनित 47 शहरों में महाराष्ट्र के सबसे ज्यादा 10 शहर शामिल हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के 7 शहरों को जगह मिली है. झारखंड के दो शहरों का चयन होना एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि पड़ोसी राज्य बिहार से सिर्फ एक और पश्चिम बंगाल व छत्तीसगढ़ से भी 2-2 शहरों को ही इस सूची में रखा गया है. इस पहल से उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में रांची और धनबाद के बुनियादी ढांचे और स्थानीय बाजार की जरूरतों के हिसाब से सटीक नीतियां बन सकेंगी.