Tatanagar Press Conference: चक्रधरपुर रेल मंडल में ट्रेनों की लगातार हो रही देरी से परेशान यात्रियों के लिए अब राहत की खबर सामने आई है। टाटानगर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि बीते दो हफ्तों में ट्रेनों के संचालन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि रेलवे द्वारा अपनाए गए रणनीतिक उपायों और लगातार निगरानी के चलते अब ट्रेनों की लेटलतीफी में काफी कमी आई है, जिससे यात्रियों को भी राहत मिल रही है और संचालन व्यवस्था पहले की तुलना में बेहतर होती दिख रही है।
देरी में कमी, 120 मिनट से घटकर 60 मिनट तक पहुंचा समय
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पहले जहां ट्रेनें औसतन करीब 120 मिनट यानी दो घंटे तक लेट चल रही थीं, अब उस देरी को घटाकर 90 से 60 मिनट के बीच लाया गया है। सीनियर डीसीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सुधार शुरुआती चरण है और आने वाले समय में इसे और बेहतर बनाने की दिशा में काम जारी है। रेलवे का लक्ष्य है कि धीरे-धीरे इस देरी को घटाकर 15 से 20 मिनट तक सीमित किया जाए। इसके लिए कंट्रोल रूम से लेकर फील्ड स्तर तक चौबीसों घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की बाधा को समय रहते दूर किया जा सके।
65 प्रतिशत ट्रेनें समय पर, बाकी पर काम जारी
आंकड़ों के आधार पर जानकारी दी गई कि पिछले 15 दिनों में ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार हुआ है और अब लगभग 65 प्रतिशत ट्रेनें समय पर चल रही हैं। हालांकि, अभी भी 35 प्रतिशत ट्रेनों में देरी बनी हुई है, जिसका मुख्य कारण अन्य रेल मंडलों से ट्रेनों का पहले से लेट होकर आना बताया गया है। अधिकारियों ने कहा कि यदि कोई ट्रेन अपने पिछले मंडल से ही देर से प्रवेश करती है, तो उसका सीधा असर चक्रधरपुर मंडल के पूरे परिचालन पर पड़ता है, जिससे समय प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
चेन पुलिंग और मेंटेनेंस बना देरी का कारण
रेलवे ने ट्रेनों की देरी के पीछे कुछ प्रमुख कारणों का भी उल्लेख किया है, जिनमें सबसे बड़ा कारण अनावश्यक चेन पुलिंग बताया गया है। मंडल में रोजाना 5 से 10 ट्रेनों में बिना वजह चेन पुलिंग की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे पीछे आने वाली कई ट्रेनें प्रभावित हो जाती हैं। इसके अलावा ट्रैक मेंटेनेंस भी एक जरूरी प्रक्रिया है, जिसके तहत कई सेक्शनों में ब्लॉक लेकर मशीनों के जरिए मरम्मत कार्य किया जा रहा है, ताकि भविष्य में यात्रा सुरक्षित और सुचारू रह सके।
ट्रेनों का दबाव भी बड़ी चुनौती, 26 अप्रैल के आंकड़े सामने
सीनियर डीसीएम ने यह भी बताया कि मंडल पर ट्रेनों का दबाव लगातार बना हुआ है, जिससे समय प्रबंधन और भी जटिल हो जाता है। 26 अप्रैल के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उस दिन अप और डाउन लाइन मिलाकर कुल 47 यात्री ट्रेनें संचालित हुईं, जबकि मालगाड़ियों का भी काफी दबाव रहा, जिसमें अप लाइन में 35 और डाउन लाइन में 32 मालगाड़ियां चलीं। इतने अधिक ट्रैफिक के बीच ट्रेनों को समय पर चलाना एक बड़ी चुनौती बन जाती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार पर जोर, भविष्य में और सुधार की उम्मीद
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रेनों की लेटलतीफी को स्थायी रूप से कम करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर तेजी से काम किया जा रहा है। टाटानगर स्टेशन पर प्लेटफार्म की संख्या बढ़ाने और विभिन्न सेक्शनों में लूप लाइनों के विस्तार की योजना बनाई गई है, ताकि ट्रेनों के परिचालन में बाधा कम हो सके। इसके साथ ही, हाथियों के आवागमन वाले क्षेत्रों में सुरक्षा और गति नियंत्रण के बीच संतुलन बनाए रखने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे ये परियोजनाएं पूरी होंगी, ट्रेनों की समयबद्धता और बेहतर होती जाएगी।