Jharkhand News: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में शिक्षकों की भारी कमी को देखते हुए पारा शिक्षकों के हित में बड़ा फैसला सुनाया है. गुरुवार को अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सहायक शिक्षक और सहायक आचार्य के 50 प्रतिशत आरक्षित पदों पर नियुक्ति के लिए विशेष रूप से पारा शिक्षकों से आवेदन आमंत्रित किए जाएं.
जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने यह आदेश पारा शिक्षक सुनील कुमार यादव समेत अन्य की ओर से दायर अपीलों पर सुनवाई के दौरान दिया. कोर्ट ने कहा कि पारा शिक्षक सीधे नियमितीकरण के हकदार नहीं हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने और चयन के लिए विचार किए जाने का उन्हें पूरा अधिकार है.
हर साल भरने होंगे आरक्षित पद
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष में पारा शिक्षकों के लिए आरक्षित 50 प्रतिशत रिक्त पदों को भरना अनिवार्य होगा. अदालत ने वर्तमान शैक्षणिक वर्ष के लिए सरकार को 4 सप्ताह के भीतर रिक्तियों का निर्धारण कर विज्ञापन जारी करने को कहा है. साथ ही विज्ञापन जारी होने के 10 सप्ताह के भीतर पूरी भर्ती प्रक्रिया समाप्त करने का आदेश दिया गया है.
झारखंड में 1.5 लाख शिक्षकों की कमी
सुनवाई के दौरान अदालत में बताया गया कि झारखंड के 24 जिलों में करीब 1.5 लाख शिक्षकों की कमी है. सर्व शिक्षा अभियान (SSA) के तहत प्राथमिक विद्यालयों में 83,595 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 37,133 पद स्वीकृत हैं.
राज्य सरकार ने कोर्ट को जानकारी दी कि मौजूदा नियमों के तहत अब तक 7,300 से अधिक पारा शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है. इनमें 3,304 शिक्षक आरक्षित श्रेणी और 3,997 शिक्षक ओपन श्रेणी के माध्यम से चयनित हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को राज्य के हजारों पारा शिक्षकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.