Jharkhand News: झारखंड हाई कोर्ट ने हजारीबाग के विष्णुगढ़ में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या से जुड़े मामले में सोमवार को सुनवाई की. अदालत ने इस मामले को स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के तौर पर दर्ज किया है. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट में केस डायरी, एफएसएल रिपोर्ट और डेथ रिव्यू रिपोर्ट पेश की गई, जिन्हें खंडपीठ ने देखा.
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी. अदालत ने अगली सुनवाई जून में तय की है.
यह मामला विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र में दर्ज कांड संख्या 42/2026 से जुड़ा है. जांच के दौरान पुलिस ने मृत बच्ची की मां रेशमी देवी, भीम राम और एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के शक में बच्ची की हत्या की गई थी. जांच में भीम राम की संलिप्तता भी सामने आई है.
इससे पहले हुई सुनवाई में कोर्ट ने घटना को बेहद संवेदनशील और अमानवीय बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई थी. अदालत ने कहा था कि इस तरह की घटना समाज और मानवता दोनों के लिए शर्मनाक है.
कोर्ट को यह भी बताया गया था कि घटना 24 मार्च को हुई थी, लेकिन प्राथमिकी अगले दिन दर्ज की गई. इस पर अदालत ने सवाल उठाते हुए हजारीबाग पुलिस प्रशासन से पूछा था कि आरोपियों की गिरफ्तारी और वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया में देरी क्यों हुई.
खंडपीठ ने यह भी जानना चाहा था कि घटना से जुड़े कपड़े और अन्य अहम साक्ष्य समय पर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए थे या नहीं. अदालत ने कहा था कि देर होने से जांच और सबूत दोनों प्रभावित हो सकते हैं.
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी टिप्पणी की थी कि अगर मामला मीडिया में नहीं आता, तो संभव है कि इतनी गंभीर घटना की जानकारी अदालत तक नहीं पहुंच पाती.