Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-05-11

Jharkhand News: झारखंड में बालू खनन के बदले नियम, ग्रामसभा की हरी झंडी के बिना नहीं होगा समझौता, पारदर्शिता पर सरकार का जोर

Jharkhand: झारखंड सरकार ने राज्य में बालू खनन की व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए नियमावली में बड़े बदलाव किए हैं। खान एवं भूविज्ञान विभाग द्वारा झारखंड सैंड माइनिंग संशोधन नियमावली-2026 की अधिसूचना जारी कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत अब बालू घाटों के आवंटन से लेकर भुगतान की प्रक्रिया तक में कई कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर अनुसूचित क्षेत्रों में दिखेगा, जहां अब स्थानीय ग्रामसभा की सहमति को अनिवार्य बना दिया गया है।

पेसा कानून के तहत ग्रामसभा को मिली बड़ी शक्ति
नई नियमावली की सबसे खास बात यह है कि अनुसूचित क्षेत्रों में अब बिना ग्रामसभा की मंजूरी के बालू घाटों की लीज का एग्रीमेंट नहीं किया जा सकेगा। सरकार ने पेसा (PESA) कानून और पंचायत नियमों को प्रभावी बनाने के लिए यह कदम उठाया है। इससे स्थानीय ग्रामीणों को अपने क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण का अधिकार मिलेगा और खनन प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होगी। अब प्रशासन को लीज डीड फाइनल करने से पहले संबंधित पंचायत और ग्रामसभा से औपचारिक सहमति लेनी होगी।

लीज अवधि और भुगतान की नई व्यवस्था
सरकार ने लीजधारकों के लिए भुगतान की प्रक्रिया को तीन चरणों में विभाजित कर दिया है। अब लीजधारकों को कुल राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा पहले परमिट के जारी होने से पहले ही जमा करना होगा, जबकि शेष 25-25 प्रतिशत की दो किस्तें तीसरी और चौथी तिमाही में देय होंगी। इसके अलावा, अब लीज की अवधि की गणना उस दिन से की जाएगी जिस दिन लीज डीड का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) होगा। इससे उन ठेकेदारों को राहत मिलेगी जो कागजी कार्यवाही में देरी के कारण अपने समय का नुकसान उठा रहे थे।

राजस्व और पर्यावरण संरक्षण पर कड़ा रुख
नई नियमावली में केवल रॉयल्टी ही नहीं, बल्कि डीएमएफटी, जीएसटी, आयकर और पर्यावरण उपकर जैसी देनदारियों को भी सख्ती से लागू किया गया है। पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि लीजधारकों को अनिवार्य रूप से वृक्षारोपण करना होगा और धूल एवं प्रदूषण नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम करने होंगे। साथ ही, अब हर महीने की रिपोर्ट 10 तारीख तक जमा करना अनिवार्य है, जिसमें देरी होने पर प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना वसूलने का प्रावधान किया गया है।

विवाद सुलझाने और विकास कार्यों के लिए स्पष्ट नियम
झारखंड के 16 जिलों में चल रही 229 बालू घाटों की टेंडर प्रक्रिया को गति देने के लिए यह संशोधन मील का पत्थर साबित होंगे। सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर लीज क्षेत्र के भीतर किसी सार्वजनिक कार्य (जैसे सड़क निर्माण) की जरूरत पड़ती है, तो लीजधारक को उसमें सहयोग करना होगा। किसी भी कानूनी विवाद की स्थिति में अब सुनवाई संबंधित जिले की सिविल अदालत में ही होगी। 5 वर्षों के लिए दी जाने वाली इस लीज व्यवस्था से राज्य में बालू की किल्लत दूर होने और अवैध खनन पर लगाम लगने की उम्मीद है।



WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !