Jamshedpur Big News: जमशेदपुर के बारीडीह स्थित विजया गार्डन्स में पाइपलाइन एलपीजी आपूर्ति को सीमित करने का गंभीर मामला अब जिला उपभोक्ता फोरम पहुंच गया है. यह विवाद बजरंग इंडेन गैस एजेंसी से जुड़ा है, जो अपनी विवादित कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सुर्खियों में है. गौर करने वाली बात यह है कि यह वही एजेंसी है, जिस पर महज एक महीने पहले 2 अप्रैल को गैस की कालाबाजारी और ग्राहकों के साथ मारपीट करने के संगीन आरोप लगे थे. ताजा मामले में, 24 घंटे की गैस सप्लाई को बिना किसी पूर्व सूचना के मात्र कुछ घंटों तक सीमित कर दिया गया है, जिससे सैकड़ों परिवारों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है.
विजया गार्डन्स में गैस सप्लाई पर अवैध ब्रेक
शिकायतकर्ता जयगोपाल सोनी की याचिका पर 8 मई को जिला उपभोक्ता फोरम में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. मामले की गंभीरता को देखते हुए फोरम ने कड़ा रुख अपनाया और तीन पक्षों को प्रतिवादी बनाने का आदेश दिया है. इसमें सबसे पहले बजरंग गैस एजेंसी, फिर इंडेन गैस के एरिया सेल्स मैनेजर और अंत में भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय को प्रतिवादी बनाया गया है. उपभोक्ताओं का तर्क है कि फ्लैट खरीदते समय 24×7 गैस का वादा किया गया था, लेकिन अब मनमाने ढंग से सुबह, दोपहर और शाम के तीन स्लॉट तय कर सेवा में कमी की जा रही है.
2 अप्रैल का वह दिन: जब कालाबाजारी के विरोध पर हुआ था हंगामा
बजरंग इंडेन गैस एजेंसी का विवादों से पुराना नाता रहा है. बीते 2 अप्रैल को सोनारी स्थित इस एजेंसी पर उपभोक्ताओं ने खुलेआम एलपीजी सिलेंडर को 2,500 रूपए में बेचने का आरोप लगाया था. जब स्थानीय नागरिकों ने इस लूट का विरोध किया, तो एजेंसी संचालक के परिवार ने कथित तौर पर ग्राहकों के साथ मारपीट की और अभद्र भाषा का प्रयोग किया. उस समय मौके पर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से जनता में प्रशासन के खिलाफ भारी रोष व्याप्त हो गया था, जो अब इस नए विवाद के साथ फिर से भड़क उठा है.
प्रशासनिक चुप्पी और उपभोक्ताओं की आर-पार की लड़ाई
दोनों ही घटनाओं में एक बात समान रही है कि प्रशासनिक स्तर पर उपभोक्ताओं की शिकायतों की अनदेखी. विजया गार्डन्स के निवासियों ने डीसी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी और आईओसीएल (IOCL) के पोर्टल पर कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला. अब उपभोक्ता फोरम से यह मांग की गई है कि न केवल 24×7 आपूर्ति बहाल की जाए, बल्कि उपभोक्ताओं को हुई मानसिक पीड़ा के लिए उचित मुआवजा भी दिलाया जाए. स्थानीय निवासी अब इस भ्रष्ट तंत्र और एजेंसी की मनमानी के खिलाफ एकजुट होकर कानूनी लड़ाई लड़ने का मन बना चुके हैं.