मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार पर मंडराता खतरा
ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया गया है कि इंटरनेट की सुलभ उपलब्धता के कारण बच्चे अपना अधिकांश समय ऑनलाइन गेम्स और सोशल मीडिया पर बिता रहे हैं। संस्था का कहना है कि कई ऑनलाइन गेम्स युवाओं को जुआ, हिंसा और लत की ओर धकेल रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप बच्चों में मानसिक तनाव, अवसाद (डिप्रेशन) और चिंता जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर अनियंत्रित रूप से प्रसारित हो रही आपत्तिजनक सामग्री बच्चों के व्यवहार को आक्रामक और असामाजिक बना रही है, जो समाज के लिए एक खतरे की घंटी है।
NHRCCB की जनहितकारी भूमिका
संस्था ने अपने कार्यों का विवरण देते हुए बताया कि वर्ष 2017 से ही NHRCCB मानवाधिकार संरक्षण और अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में सक्रिय है। देश भर में जागरूकता अभियान और सेमिनारों के माध्यम से संस्था ने समाज के कमजोर वर्गों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हुए अब संस्था ने डिजिटल युग की इस सबसे बड़ी चुनौती के खिलाफ आवाज उठाई है, ताकि आने वाली पीढ़ी को इंटरनेट के कुप्रभावों से सुरक्षित रखा जा सके।
सशक्त कानून निर्माण की मांग
ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से आग्रह किया गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आयु-अनुपयुक्त कंटेंट (Age-appropriate content) सुनिश्चित करने हेतु कड़े नियम बनाए जाएं। संस्था ने मांग की है कि भ्रामक और हिंसात्मक सामग्री का प्रसार करने वाले प्लेटफॉर्म्स पर जवाबदेही तय हो और इसके लिए एक राष्ट्रीय स्तर की नीति का निर्माण किया जाए। युवाओं और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से की गई इस पहल की स्थानीय स्तर पर भी काफी सराहना की जा रही है।