National News: केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 12 मई को सीआईआई (CII) के सालाना बिजनेस समिट में देशवासियों को ईंधन की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं. मंत्री ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया कि सरकार ने हालिया राज्य चुनावों के कारण तेल के दाम नहीं बढ़ाए थे. उन्होंने स्पष्ट किया कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों और चुनावों का आपस में कोई लेना-देना नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले चार वर्षों से कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और राजकोषीय दबाव के कारण सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं.
ऑयल कंपनियों की आर्थिक सेहत बिगड़ी, अंडर-रिकवरी का बढ़ा बोझ
मंत्री ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की वित्तीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि ये कंपनियां हर दिन 1,000 करोड़ रूपए का भारी नुकसान झेल रही हैं. वर्तमान में इन कंपनियों की अंडर-रिकवरी 1,98,000 करोड़ रूपए तक पहुंच गई है और महज एक तिमाही में कुल नुकसान 1 लाख करोड़ रूपए रहा है. हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पिछले साल कंपनियों ने जो भी मुनाफा कमाया था, वह मौजूदा दरों पर तेल बेचने के कारण खत्म होता जा रहा है. अब सवाल यह है कि कंपनियां इस घाटे को कब तक बर्दाश्त कर पाएंगी.
पश्चिम एशिया युद्ध और पीएम मोदी का बयान
पेट्रोलियम मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान का हवाला देते हुए कहा कि यदि पश्चिम एशिया में युद्ध जारी रहता है, तो भारत को अपने राजकोषीय दबाव (Fiscal Pressure) को प्रबंधित करने के लिए कड़े निर्णय लेने होंगे. उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक अस्थिरता का सीधा असर घरेलू ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है. हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि देश में ईंधन की कोई किल्लत नहीं है. भारत के पास फिलहाल 60 दिनों का कच्चा तेल और एलएनजी (LNG) तथा 45 दिनों की एलपीजी (LPG) का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.
LPG उत्पादन बढ़ा, आपूर्ति संकट के दावों को नकारा
मंत्री ने आपूर्ति व्यवस्था पर जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने एलपीजी का उत्पादन पहले के 35,000 टन से बढ़ाकर 55,000-56,000 टन कर दिया है. उन्होंने दावा किया कि ओएमसी ने उपभोक्ताओं को महंगाई की मार से बचाने के लिए खुद नुकसान उठाया है और लगभग सभी क्षेत्रों में गैस की निर्बाध आपूर्ति बहाल कर दी गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि मंत्री के इन बयानों के बाद अब पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दामों में किसी भी समय वृद्धि की घोषणा की जा सकती है, जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ना तय है.