SIR Voter Verification: देश में मतदाता सूची को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने अब तीसरे चरण के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR अभियान का बड़ा ऐलान किया है. चुनाव आयोग ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट की समीक्षा प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है. इस अभियान के जरिए करोड़ों मतदाताओं का घर घर जाकर सत्यापन किया जाएगा.चुनाव आयोग के इस फैसले को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल के महीनों में पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची, फर्जी वोटर और बाहरी नामों को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार तेज हुआ है. अलग अलग राजनीतिक दलों की तरफ से वोटर लिस्ट की पारदर्शिता पर सवाल उठाए जाते रहे हैं. ऐसे माहौल में चुनाव आयोग का यह अभियान आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
36 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं का होगा सत्यापन, लाखों BLO और BLA संभालेंगे जिम्मेदारी
चुनाव आयोग के मुताबिक SIR के तीसरे चरण में 3.94 लाख से अधिक बूथ लेवल अफसर यानी BLO घर घर जाकर मतदाताओं की पहचान और दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे. इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की तरफ से नियुक्त 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट यानी BLA भी सहयोग करेंगे. आयोग का कहना है कि इस अभियान का मकसद मतदाता सूची को ज्यादा पारदर्शी, अपडेट और त्रुटिरहित बनाना है ताकि चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा मजबूत हो सके. खास बात यह है कि तीसरे चरण के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर लगभग पूरा देश इस अभियान के दायरे में आ जाएगा. इन तीन क्षेत्रों के लिए कार्यक्रम की घोषणा बाद में की जाएगी.
चुनाव आयोग के अनुसार पहले और दूसरे चरण में देश के 13 राज्यों के करीब 59 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन पहले ही किया जा चुका है. उस दौरान 6.3 लाख BLO और 9.2 लाख BLA इस अभियान में सक्रिय रहे थे.
पंजाब चुनाव से पहले SIR पर बढ़ी राजनीतिक नजर, जानिए किस राज्य में कब शुरू होगी प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने अलग अलग राज्यों में SIR अभियान की तारीखें भी घोषित कर दी हैं. ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में 1 जुलाई से प्रक्रिया शुरू होगी. दादरा नगर हवेली और दमन दीव में अंतिम वोटर लिस्ट 6 सितंबर को जारी की जाएगी.
उत्तराखंड में भी 1 जुलाई से SIR शुरू होगा और अंतिम मतदाता सूची 15 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी. आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा और चंडीगढ़ में प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और वहां 22 सितंबर को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी. सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा पंजाब को लेकर हो रही है क्योंकि वहां विधानसभा चुनाव से पहले 1 अक्टूबर से SIR प्रक्रिया शुरू की जाएगी. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि चुनाव से ठीक पहले होने वाला यह अभियान राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है.
इसके अलावा तेलंगाना में भी 1 अक्टूबर से SIR शुरू होगा. वहीं दिल्ली, महाराष्ट्र, झारखंड, कर्नाटक और मेघालय में भी इसी तारीख से वोटर लिस्ट का गहन पुनरीक्षण अभियान चलेगा. नगालैंड में 1 अक्टूबर से शुरू होकर 22 नवंबर 2026 तक प्रक्रिया पूरी होगी जबकि त्रिपुरा में यह अभियान 23 दिसंबर तक चलेगा.
बंगाल के राजनीतिक विवादों के बीच बढ़ेगी चुनाव आयोग की चुनौती
पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ समय से मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज रही है. विपक्ष लगातार फर्जी वोटर और बाहरी नाम जोड़े जाने के आरोप लगाता रहा है जबकि सत्तारूढ़ दल इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताता है. ऐसे में चुनाव आयोग का यह नया अभियान सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में मतदाता सूची की विश्वसनीयता और पारदर्शिता चुनाव आयोग के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी. अब नजर इस बात पर रहेगी कि SIR अभियान के जरिए आयोग चुनावी प्रक्रिया में भरोसा मजबूत कर पाता है या यह मुद्दा आगे भी राजनीतिक विवाद का केंद्र बना रहेगा.